धर्मेन्द्र भारद्वाज | मऊ
खतरनाक श्रेणी में बाल श्रमिकों के चिन्हांकन पर विशेष जोर, दुकानों व प्रतिष्ठानों में नियमित छापेमारी के निर्देश
मऊ। बाल श्रम उन्मूलन को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी श्री आनंद वर्द्धन ने निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष शत-प्रतिशत बाल श्रमिकों का चिन्हांकन और उनके समयबद्ध पुनर्वासन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने खतरनाक श्रेणी में बाल श्रमिकों के चिन्हांकन की स्थिति पर विशेष चिंता जताते हुए प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए।
कलेक्ट्रेट सभागार में बुधवार को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बाल श्रम उन्मूलन से संबंधित जनपद स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक हुई। इसमें बाल श्रमिकों के चिन्हांकन, कार्यस्थलों से मुक्त कराने, शैक्षिक एवं आर्थिक पुनर्वासन तथा प्रवर्तन और अभियोजन की कार्रवाई की समीक्षा की गई।
जिलाधिकारी ने कहा कि निर्धारित लक्ष्य की तुलना में बाल श्रमिकों का चिन्हांकन काफी कम है। वहीं खतरनाक श्रेणी में अब तक एक भी बाल श्रमिक चिन्हित नहीं किया गया है, जो गंभीर विषय है। उन्होंने प्रवर्तन अधिकारी को लक्ष्य के सापेक्ष शत-प्रतिशत चिन्हांकन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही चिन्हित बच्चों का समयबद्ध तरीके से शैक्षिक और आर्थिक पुनर्वासन कराने तथा संबंधित मामलों में नियमानुसार अभियोजन की कार्रवाई करने को कहा।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कार्रवाई केवल औपचारिकता तक सीमित न रहे। बाल श्रमिकों को कार्य से मुक्त कराने के साथ उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए शिक्षा और रोजगारपरक योजनाओं से जोड़ने की दिशा में ठोस प्रयास किए जाएं। कार्यस्थलों से मुक्त कराए गए बच्चों और उनके परिवारों को पात्रता के अनुसार श्रम विभाग तथा अन्य विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाए।
ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष कैम्प लगाकर जागरूकता अभियान चलाने के भी निर्देश दिए गए। कैम्प के माध्यम से श्रमिकों को श्रम विभाग की योजनाओं की जानकारी देने के साथ पात्र लोगों को लाभान्वित करने और मनरेगा श्रमिकों का पंजीकरण कराकर रोजगार उपलब्ध कराने की कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया।
दुकानों और प्रतिष्ठानों में होगी छापेमारी
जिलाधिकारी ने दुकानों, अधिष्ठानों और औद्योगिक संस्थानों में नियमित निरीक्षण एवं छापेमारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाल श्रम का मामला सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उद्यमियों को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए, लेकिन नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ कार्रवाई में किसी प्रकार की शिथिलता नहीं बरती जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि 14 वर्ष से कम आयु के चिन्हित बाल श्रमिकों को तत्काल कार्यस्थल से हटाकर 24 घंटे के भीतर बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। बच्चे को कार्य से पूरी तरह पृथक कराने के साथ उसकी देखभाल और संरक्षण की आवश्यक व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। इसके लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला स्तरीय अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने कहा कि बाल श्रम पर प्रभावी रोक के लिए सभी विभागों को संवेदनशीलता और आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा। अगली बैठक में चिन्हांकन, पुनर्वासन, अभियोजन और अन्य निर्देशों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की जाएगी।
बैठक में अपर जिलाधिकारी श्री प्रवेन्द्र कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी डॉ. श्वेता त्रिपाठी समेत संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
