सेवराई (गाजीपुर)। स्थानीय तहसील क्षेत्र की अति प्राचीनतम सेवराई गढ़ी ग्राम रामलीला समिति की ओर से बीते नौ अक्टूबर से शुरू हुई रामलीला का बीती रात रामराज्याभिषेक के साथ विधिवत समापन हो गया। समापन अवसर पर दो दिवसीय ‘हीरा रतन’ और ‘माई के लाल’ अभिनय का मंचन किया गया। प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक के प्रसंग के साथ रामलीला परिसर भक्तिमय माहौल में डूब गया। इस दौरान ग्रामीणों ने रामलीला के सफल आयोजन में सहभागिता निभाई।
रामलीला के समापन पर समिति के अध्यक्ष संजय सिंह ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले समिति के समस्त सदस्यों, कलाकारों और ग्रामीणों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने प्रभु श्रीराम की कृपा से अगले वर्ष भी इसी उत्साह और श्रद्धा के साथ रामलीला आयोजन करने का संकल्प दोहराया।
अध्यक्ष संजय सिंह ने रामलीला के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि गांव के पूर्वजों ने वर्ष 1883 में इस रामलीला की नींव रखी थी। उस समय सीमित संसाधनों के बावजूद गांव के लोगों ने मिलकर रामलीला मंचन की परंपरा शुरू की थी। पूर्वजों द्वारा शुरू की गई इस परंपरा को आज गांव के बुजुर्ग और युवा पीढ़ी मिलकर आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह पूरे गांव के लिए गर्व की बात है कि करीब 143 वर्षों से रामलीला की परंपरा निरंतर कायम है।
उन्होंने कहा कि समय के साथ परिस्थितियां बदलीं और संसाधनों में भी बदलाव आया, लेकिन ग्रामीणों की आस्था, समर्पण और सहयोग ने इस परंपरा को जीवित रखा है। रामलीला के आयोजन में गांव के लोगों की सामूहिक भागीदारी इसकी सबसे बड़ी विशेषता है। बुजुर्गों के अनुभव और युवाओं के उत्साह के समन्वय से यह धार्मिक आयोजन आज भी अपनी पहचान बनाए हुए है।
रामलीला के सफल समापन के साथ ही एक बार फिर सेवराई गढ़ी के ग्रामीणों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संदेश दिया। अध्यक्ष ने सभी सहयोगियों का धन्यवाद करते हुए उम्मीद जताई कि भविष्य में भी इसी तरह सभी के सहयोग से रामलीला की यह ऐतिहासिक परंपरा आगे बढ़ती रहेगी।
