बहादुरगंज, गाज़ीपुर। कस्बे के मोहल्ला दक्खिन, वार्ड नंबर 11, नाऊ टोली निवासी मशहूर चिकित्सक डॉ. फिदा हुसैन के अचानक इंतकाल से पूरे कस्बे में गम की लहर दौड़ गई। बताया गया कि बुधवार को हार्ट अटैक के चलते उनका अचानक इंतकाल हो गया। उनके इंतकाल की खबर मिलते ही परिजनों, रिश्तेदारों, दोस्तों, अहबाब और शुभचिंतकों में शोक की लहर फैल गई। गुरुवार को उनके जनाज़े में बड़ी तादाद में लोगों ने शिरकत की और नम आंखों से उन्हें आखिरी विदाई दी।
डॉ. फिदा हुसैन की नमाज़-ए-जनाज़ा गुरुवार को दोपहर बाद नई ईदगाह में अदा की गई। नमाज़-ए-जनाज़ा मौलवी इनामुलहक कासमी ने पढ़ाई। इस मौके पर बहादुरगंज कस्बे के अलावा आसपास के इलाकों से भी बड़ी तादाद में लोग पहुंचे। जनाज़े में उमड़ी भीड़ से अंदाजा लगाया जा सकता था कि डॉ. फिदा हुसैन लोगों के बीच कितने मकबूल थे।
नमाज़-ए-जनाज़ा के बाद जनाज़े को तदफ़ीन के लिए इमामबाड़े ले जाया गया, जहां उनकी तदफ़ीन की गई। इस दौरान मौजूद लोगों ने मरहूम की मगफिरत और उनके अहलेखाना के लिए सब्र की दुआएं कीं। गमगीन माहौल में परिजनों और शुभचिंतकों ने उन्हें नम आंखों से आखिरी विदाई दी।
बताया जाता है कि डॉ. फिदा हुसैन का व्यवहार सभी के साथ बेहद खुशमिजाज, मिलनसार और शफीकाना था। यही वजह थी कि वह कस्बे के हर वर्ग के लोगों के बीच लोकप्रिय थे। उनके अचानक इंतकाल की खबर से हर वर्ग के लोगों में गहरा सदमा देखा गया। बड़ी तादाद में लोग उनके आवास पर पहुंचकर परिजनों से मुलाकात करते रहे और उन्हें ढांढस बंधाते हुए अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
डॉ. फिदा हुसैन अपने पीछे पत्नी सुल्ताना खातून, चार पुत्रों डॉक्टर आबिद हुसैन, मोहम्मद दानिश, मोहम्मद आदिल और मोहम्मद सैफ तथा चार पुत्रियों शगुफ्ता परवीन, शाइस्ता परवीन, संजीदा परवीन और सानिया परवीन समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके इंतकाल से परिवार पर गम का पहाड़ टूट पड़ा है। तदफ़ीन के दौरान परिजनों की आंखों से आंसू छलकते रहे।
स्थानीय लोगों ने कहा कि डॉ. फिदा हुसैन का अचानक दुनिया से रुख्सत हो जाना बहादुरगंज के लिए एक बड़ा नुकसान है। लोगों ने मरहूम के लिए दुआ-ए-मगफिरत करते हुए अल्लाह तआला से उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाने और उनके परिवार को इस मुश्किल घड़ी में सब्र-ए-जमील अता करने की दुआ की।
