नम आंखों के साथ मौलवी अफजल हुए सुपुर्द-ए-खाक, जनाजे में उमड़ी भारी भीड़


बहादुरगंज, गाजीपुर। चेन्नई में सड़क दुर्घटना में असमय काल के गाल में समा जाने वाले बहादुरगंज कस्बा निवासी मौलवी मोहम्मद अफजल हसन को शुक्रवार को नम आंखों के साथ उनके आबाई कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। उनके जनाजे में क्षेत्र के हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। हर आंख नम थी और हर जुबान पर मरहूम के लिए दुआएं थीं। इस दर्दनाक हादसे ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे बहादुरगंज कस्बे को गमगीन कर दिया है।

जानकारी के अनुसार मोहम्मद अफजल हसन रोजी-रोटी की तलाश में चेन्नई में रहकर नौकरी करते थे। विगत दिनों रात में ड्यूटी समाप्त कर अपने आवास की ओर लौट रहे थे। इसी दौरान सड़क पार करते समय एक तेज रफ्तार ट्रक ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। हादसे की खबर मिलते ही उनके परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

शुक्रवार को उनका पार्थिव शरीर चेन्नई से विमान के माध्यम से वाराणसी लाया गया, जहां से एंबुलेंस द्वारा बहादुरगंज स्थित उनके पैतृक आवास पहुंचाया गया। दोपहर लगभग दो बजे शव के घर पहुंचते ही परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। अपनी जवान संतान का शव देखकर मां सैमुन्नेसा बेसुध हो गईं, जबकि पत्नी फिरोजा खातून का रो-रोकर बुरा हाल था। भाई-बहनों और अन्य परिजनों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।

मोहल्ले और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए उनके आवास पर पहुंचे। लोगों ने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर संवेदनाएं व्यक्त कीं और इस दुख की घड़ी में हिम्मत बनाए रखने की बात कही। अफजल के मिलनसार स्वभाव, नेक अखलाक और मेहनतकश जीवन की चर्चा हर कोई कर रहा था। लोगों का कहना था कि अफजल एक बेहद शरीफ, मददगार और खुशमिजाज इंसान थे, जिनकी कमी हमेशा महसूस की जाएगी।

बाद नमाज-ए-जुमा उनका जनाजा अदा किया गया। जनाजे की नमाज अलहाज मौलाना अजीजुल हसन नदवी ने पढ़ाई। नमाज-ए-जनाजा में क्षेत्र के उलेमा, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा आम नागरिकों सहित भारी संख्या में लोग शामिल हुए। जनाजे में उमड़ी भीड़ इस बात का प्रमाण थी कि अफजल लोगों के बीच कितने लोकप्रिय और सम्मानित थे।

जनाजे के बाद उन्हें उनके आबाई कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। दफन के दौरान उपस्थित लोगों ने उनकी मगफिरत, बुलंद-ए-दराजात और जन्नतुल फिरदौस में आला मकाम की दुआ की। साथ ही अल्लाह तआला से उनके परिजनों को सब्र-ए-जमील अता करने की प्रार्थना की।

मृतक अपने पीछे माता सैमुन्नेसा, पत्नी फिरोजा खातून, पुत्र जिशान, पुत्र जोहान तथा पुत्री अस्का सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनकी असमय मृत्यु से पूरा परिवार गहरे सदमे में है। बहादुरगंज क्षेत्र के लोगों ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि मौलवी मोहम्मद अफजल हसन का निधन समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।

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