माताओं ने संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए रखा जिउतिया व्रत


भांवरकोल/गाजीपुर। संतान की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सुखमय जीवन की कामना को लेकर शनिवार को क्षेत्र में महिलाओं ने श्रद्धा और आस्था के साथ जिउतिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत रखा। इस अवसर पर महिलाओं ने निर्जला उपवास कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। शाम को विभिन्न गंगा घाटों पर स्नान के बाद महिलाओं ने व्रत कथा का श्रवण किया।

क्षेत्र के सियाड़ी गांव निवासी कर्मकांड के विद्वान पंडित हृषिकेश तिवारी ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत युद्ध के बाद अश्वत्थामा ने प्रतिशोध की भावना से अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रहे शिशु को ब्रह्मास्त्र से नष्ट करने का प्रयास किया था। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी दिव्य कृपा से गर्भस्थ शिशु को जीवनदान दिया। आगे चलकर यही बालक परीक्षित कहलाया। धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से जीवन प्राप्त होने के कारण संतान की रक्षा और दीर्घायु की कामना से इस व्रत की परंपरा प्रचलित हुई।

महिलाएं इस व्रत को पूरी निष्ठा और संयम के साथ करती हैं। मान्यता है कि जिउतिया व्रत मातृत्व के प्रेम, त्याग और संतान के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक है। इस ब़त का पारण महिलाएं रविवार को करेंगी।

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