नंदगंज (ग़ाज़ीपुर)। रिटेल केमिस्ट एंड डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के संगठन मंत्री पुनीत सिंघल (गाज़ीपुर) ने एक भेंटवार्ता में कहा कि ऑनलाइन फार्मा कंपनियों द्वारा दिए जा रहे भारी डिस्काउंट के कारण स्थानीय केमिस्टों का व्यापार गंभीर संकट से गुजर रहा है। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की डिस्काउंट नीति के चलते स्थानीय दवा दुकानदारों की बिक्री में लगभग 60 प्रतिशत तक की गिरावट आई है, जिससे अनेक छोटे केमिस्ट अपनी दुकानें बंद करने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
पुनीत सिंघल ने कहा कि सरकार को छोटे व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए ऑनलाइन फार्मा कंपनियों और स्थानीय केमिस्टों के बीच ‘लेवल प्लेइंग फील्ड’ (समान प्रतिस्पर्धा का वातावरण) सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि प्रदेश और देश के लाखों फार्मासिस्टों एवं दवा व्यवसायियों का भविष्य सुरक्षित रह सके।
उन्होंने आरोप लगाया कि ऑनलाइन फार्मा कंपनियां भारी निवेश और फंडिंग के बल पर दवाइयों को लागत से भी कम कीमत (डीप डिस्काउंटिंग) पर बेच रही हैं। दूसरी ओर स्थानीय केमिस्टों को दुकान का किराया, बिजली का बिल, कर्मचारियों का वेतन तथा अन्य परिचालन खर्च वहन करने पड़ते हैं। ऐसे में वे इतने बड़े स्तर पर छूट देने की स्थिति में नहीं हैं, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धा लगातार कमजोर होती जा रही है।
श्री सिंघल ने सरकार से मांग की कि ऐसी नीतियां बनाई जाएं जिनमें ऑनलाइन कंपनियों और ऑफलाइन केमिस्टों के लिए नियम एवं शर्तें समान हों। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स द्वारा दिए जाने वाले अत्यधिक और अवास्तविक डिस्काउंट पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जाए। साथ ही, जिस प्रकार ऑफलाइन दवा विक्रेताओं के लिए लाइसेंस, बिलिंग और नियमित निरीक्षण के कड़े नियम लागू हैं, उसी प्रकार ऑनलाइन फार्मा कंपनियों पर भी समान रूप से सख्ती बरती जाए।
उन्होंने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी बड़ी कंपनी अपनी वित्तीय ताकत का इस्तेमाल कर छोटे दवा व्यवसायियों को बाजार से बाहर न कर सके। यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो प्रदेश के हजारों छोटे केमिस्टों के सामने रोज़गार का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
