गाजीपुर।किसानों को टिकाऊ कृषि, स्वस्थ मृदा और बेहतर उत्पादन के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से आईसीएआर-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर), वाराणसी द्वारा संचालित ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत मंगलवार को विकास खंड मनिहारी के मलिकपुरा गांव में कृषक जागरूकता एवं संवाद कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए वैज्ञानिकों से सीधे संवाद कर खेती से जुड़ी समस्याओं के समाधान प्राप्त किए।
आईआईवीआर के निदेशक डॉ. राजेश कुमार के नेतृत्व एवं अभियान के नोडल अधिकारी डॉ. नीरज सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में कुल 56 किसानों ने सहभागिता की, जिनमें 51 पुरुष एवं 5 महिला किसान शामिल रहीं।
कार्यक्रम में डॉ. विकास सिंह (प्रधान वैज्ञानिक), डॉ. अर्चना सान्याल (वरिष्ठ वैज्ञानिक) तथा शिवम राय (यंग प्रोफेशनल) ने किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती की तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। वैज्ञानिकों ने संतुलित उर्वरक उपयोग, जैव उर्वरकों की उपयोगिता, गुणवत्तायुक्त बीजों के चयन तथा मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डाला।
विशेषज्ञों ने बताया कि जैव उर्वरकों का नियमित उपयोग मृदा की उर्वराशक्ति बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण करने तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। किसानों को बीज उपचार, पौध उपचार एवं मृदा उपचार की वैज्ञानिक विधियों से भी अवगत कराया गया।
वैज्ञानिकों ने कहा कि प्रमाणित एवं गुणवत्तापूर्ण बीजों का प्रयोग बेहतर अंकुरण, स्वस्थ फसल विकास तथा अधिक उत्पादन की कुंजी है। इसके साथ ही मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक प्रबंधन अपनाने की सलाह देते हुए बताया गया कि इससे उत्पादन लागत कम होती है और भूमि की उत्पादकता लंबे समय तक बनी रहती है।
संवाद सत्र में किसानों ने फसलों में रोग-कीट नियंत्रण, उर्वरक प्रबंधन तथा उत्पादन बढ़ाने से संबंधित प्रश्न पूछे, जिनका वैज्ञानिकों ने सरल एवं व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किया। किसानों ने अभियान की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि विकास और किसानों की आर्थिक समृद्धि के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
कार्यक्रम के समापन पर वैज्ञानिकों ने किसानों से वैज्ञानिक खेती अपनाने, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण पर ध्यान देने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग का आह्वान किया। मलिकपुरा गांव में आयोजित ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत कृषक जागरूकता कार्यक्रम में किसानों को संबोधित करते आईआईवीआर के वैज्ञानिक एवं उपस्थित किसानों को बताया गया
