शादियाबाद (गाजीपुर): जनपद गाजीपुर के शादियाबाद कस्बे में हर वर्ष की भांति इस साल भी 16 अप्रैल को हजरत मलिक मर्दान शाह बाबा का पावन उर्स बड़े ही अकीदत और शानो-शौकत के साथ मनाया जाएगा। इस मौके पर दूर-दराज़ इलाकों से हजारों की संख्या में जायरीन दरगाह पर पहुंचकर बाबा की चौखट पर हाजिरी देंगे और अपनी मुरादें मांगेंगे।
हजरत मलिक मर्दान शाह बाबा को इलाके में एक बड़े सूफी संत और रहमतों के दरबार के रूप में माना जाता है। अकीदतमंदों का विश्वास है कि बाबा के दर से कोई खाली हाथ नहीं लौटता। जो भी सच्चे दिल से यहां दुआ करता है, उसकी हर मुराद पूरी होती है। बाबा की दरगाह पर हर धर्म और समुदाय के लोग पहुंचते हैं, जो आपसी भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश करता है।
उर्स के अवसर पर दरगाह परिसर को भव्य रूप से सजाया जाता है। चादरपोशी, कुरआनखानी, फातिहा और कव्वाली जैसे धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है, जिससे पूरा माहौल रूहानी रंग में रंग जाता है। रातभर चलने वाली कव्वालियों में सूफियाना कलाम गूंजते हैं, जो लोगों को आध्यात्मिक सुकून प्रदान करते हैं।
मेले में विभिन्न प्रकार की दुकानें भी सजती हैं,जहां बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए आकर्षण का केंद्र रहता है। 16 अप्रैल को बाबा के यहां जबरदस्त कव्वाली का का प्रोग्राम रखा जाता है।वही खाने-पीने की दुकानों, झूलों और स्थानीय हस्तशिल्प से मेला जीवंत हो उठता है।
स्थानीय प्रशासन और आयोजन समिति द्वारा सुरक्षा और व्यवस्थाओं के व्यापक इंतजाम किए जाते हैं, जिससे आने वाले जायरीन को किसी प्रकार की असुविधा न हो।यह उर्स न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि सामाजिक एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक समरसता का भी प्रतीक बनकर हर साल लोगों को जोड़ने का काम करता है।
