आस्था की डुबकी संग सत्तू दान, सतुआन पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब


भांवरकोल । सतुआ संक्रांति (सतुआन) के पावन अवसर पर क्षेत्र में आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि पर मनाए गए इस पर्व पर गंगा घाटों सहित विभिन्न पवित्र स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। प्रातःकाल से ही श्रद्धालु गंगा में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित करते नजर आए। स्नान के बाद विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा कर सत्तू अर्पित किया गया तथा प्रसाद के रूप में सत्तू और गुड़ का सेवन किया गया। मान्यता है कि इस दिन दान-पुण्य करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है।

शेरपुर, वीरपुर, पलियां और कोटवां घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। लोगों ने अपनी श्रद्धानुसार जरूरतमंदों को सत्तू, गुड़, चना, वस्त्र, पंखा और जल से भरे मिट्टी के घड़े का दान कर पुण्य अर्जित किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सूर्यदेव के मेष राशि में प्रवेश करने पर यह पर्व मनाया जाता है। इस दिन स्नान, जप, तप और दान का विशेष महत्व होता है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है।

परंपरा के तहत श्रद्धालु संकल्प लेकर सत्तू, गुड़, चना, श्रीफल, जल से भरा घड़ा और मौसमी फल अर्पित कर ब्राह्मणों को दान देते हैं। इसके बाद स्वयं भी सत्तू-गुड़ का सेवन करते हैं। कई स्थानों पर लोगों ने आम और पुदीना की चटनी के साथ जौ के सत्तू का स्वाद लिया। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी है।

सतुआन पर्व समाज में आस्था, दान और प्रकृति के संतुलन का सशक्त संदेश देता है।

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