मऊ। नई ट्रेन के शुभारंभ का कार्यक्रम विकास के नाम पर आयोजित हुआ, लेकिन मऊ जंक्शन का माहौल पल-पल बदलता रहा। कहीं समर्थकों की जय-जयकार गूंज रही थी तो कहीं पुलिस प्रशासन व्यवस्था संभालने में पसीना बहा रहा था। जनता ट्रेन देखने आई थी, मगर उसे राजनीति का लाइव शो भी मुफ्त में देखने को मिल गया।
कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को “न आने” की नोटिस थमा दी गई। जो कार्यकर्ता उत्साह में पहुंच भी गए, उन्हें विशेष सम्मान के साथ बस में बैठाकर पुलिस लाइन की सैर करा दी गई। विकास की रेल चलने से पहले ही राजनीति की बस दौड़ पड़ी।
उधर स्टेशन के मुख्य गेट पर आम यात्रियों की गाड़ियों को रोक दिया गया। यात्री तीखी धूप में पैदल स्टेशन तक पहुंचते रहे, जबकि नेताओं की गाड़ियां बिना किसी रेड सिग्नल के सीधे गंतव्य तक फर्राटा भरती रहीं। जनता ने भी समझ लिया कि लोकतंत्र में सब बराबर हैं, बस कुछ लोग थोड़े ज्यादा बराबर हैं।
मंच पर सांसद महोदय ने मंत्री जी के पहुंचते ही गर्मजोशी से हाथ मिलाया और “मंत्री जी की जय” से लेकर लगभग सभी की जय-जयकार कर डाली। माहौल ऐसा बना मानो ट्रेन का उद्घाटन नहीं, बल्कि चुनावी रिहर्सल चल रही हो।
हालांकि असली रोमांच तब आया जब मंत्री जी ने अपने संबोधन में तंज कसते हुए कहा कि “ऊर्जा बचाकर रखिए, कहीं प्लॉट पर कब्जा न हो जाए।” इतना सुनते ही सांसद महोदय तत्काल खड़े हो गए। दर्शकों को कुछ पल के लिए लगा कि अब रेल से ज्यादा तेज राजनीतिक बहस दौड़ने वाली है।
दोनों नेताओं के भाषणों के दौरान समर्थक भी पीछे नहीं रहे। वे आपस में बहसबाजी करते रहे, जबकि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पंच की भूमिका निभाते हुए मोर्चा संभाले रहे। किसी तरह कार्यक्रम की गाड़ी पटरी पर बनी रही।
कार्यक्रम स्थल पर कुर्सी और कूलर की हवा भी राजनीतिक महत्व हासिल कर गई। भाजपा कार्यकर्ता खुद आपस में इस मुद्दे पर भिड़ते दिखाई दिए कि आखिर ठंडी हवा का असली हकदार कौन है। गर्मी इतनी थी कि विकास से ज्यादा चर्चा कूलर की हो रही थी।
इस पूरे घटनाक्रम को देखकर आम जनता का निष्कर्ष बेहद सरल रहा “नेता जी जय-जयकार करते रहें, समर्थक बहस करते रहें, हमें तो बस काम चाहिए। कोई सड़क बना दे, रोजगार दिला दे और विकास करवा दे, बाकी ट्रेन का उद्घाटन भी अच्छा है।”
कुल मिलाकर नई ट्रेन जरूर चली, लेकिन मऊ जंक्शन पर राजनीति, प्रोटोकॉल, तंज, बहस और कूलर की हवा भी पूरे वेग से दौड़ती रही।
