धर्मेन्द्र भारद्वाज | मऊ
मऊ। उप आबकारी आयुक्त, आजमगढ़ प्रभार की अध्यक्षता में जनपद मऊ के थोक एवं फुटकर आबकारी अनुज्ञापियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में मदिरा दुकानों के सुचारू संचालन, निर्धारित मूल्य पर बिक्री, समय सीमा के पालन और अवैध मदिरा की बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर सख्त दिशा-निर्देश दिए गए।
बैठक में जिला आबकारी अधिकारी मऊ, आबकारी निरीक्षक क्षेत्र-1, 2, 3 एवं 4 सहित जिले के सभी थोक एवं फुटकर आबकारी अनुज्ञापी मौजूद रहे। उप आबकारी आयुक्त ने थोक देशी मदिरा, विदेशी मदिरा एवं बीयर अनुज्ञापियों को दुकानों पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रखने के निर्देश दिए।
कांवड़ मार्ग पर स्थित आबकारी दुकानों की व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए। दुकानों पर किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए आबकारी निरीक्षकों को आवश्यक कार्रवाई करने तथा दुकानों को पर्दे आदि से ढकने के निर्देश दिए गए।
उप आबकारी आयुक्त ने आबकारी दुकानों की क्रॉस चेकिंग कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि एक क्षेत्र में तैनात आबकारी निरीक्षकों से दूसरे क्षेत्रों की दुकानों की भी जांच कराई जाए। सभी फुटकर दुकानों पर प्रत्येक ब्रांड की पर्याप्त उपलब्धता और उत्पादों का उचित डिस्प्ले सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि मदिरा की बिक्री केवल निर्धारित मूल्य पर ही की जाए। ओवररेटिंग की शिकायत मिलने अथवा इसकी पुष्टि होने पर संबंधित विक्रेता और अनुज्ञापी के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा निर्धारित समयावधि से पहले या समय समाप्त होने के बाद मदिरा की बिक्री पाए जाने पर भी विधिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
बैठक में दुकानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों को लगातार क्रियाशील रखने, रियल टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने और सभी दुकानों पर ऑनलाइन भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
उप आबकारी आयुक्त ने बताया कि मंडलीय प्रवर्तन टीम द्वारा जनपद की आबकारी दुकानों की चेकिंग की जाएगी। किसी भी दुकान पर अवैध मदिरा अथवा गैर-प्रांत की शराब की बिक्री पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ कठोर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
निर्देशों के क्रम में जिला आबकारी अधिकारी, आबकारी निरीक्षकों और प्रवर्तन टीम द्वारा जिले की दुकानों की निरंतर जांच एवं निरीक्षण किया जा रहा है। विभाग का उद्देश्य अवैध मदिरा की बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण रखते हुए राजस्व क्षति को रोकना है।
