शहीदों की धरती शेरपुर में शराब की दुकान को लेकर उबाल, ग्रामीणों ने डीएम को सौंपा ज्ञापन


भांवरकोल। ऐतिहासिक और शहीदों की धरती के रूप में पहचान रखने वाले शेरपुर गांव में सरकारी शराब की दुकान आवंटित किए जाने के फैसले को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों ने इस निर्णय को गांव की गौरवशाली परंपरा और शहीदों के सम्मान के खिलाफ बताते हुए इसे तत्काल निरस्त करने की मांग की है।ग्रामीणों का कहना है कि शेरपुर गांव का स्वतंत्रता संग्राम में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। 18 अगस्त 1942 को डॉ. शिवपूजन राय के नेतृत्व में यहां के स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आंदोलन करते हुए मुहम्मदाबाद तहसील मुख्यालय पर प्रदर्शन किया था। उस दौरान कई युवाओं ने सीने पर गोलियां खाकर मातृभूमि के लिए शहादत दी थी। बताया जाता है कि इस घटना की रिपोर्ट जब ब्रिटेन तक पहुंची तो उस समय के ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल तक यह संदेश गया कि भारत के युवा आजादी के लिए जान देने से भी पीछे नहीं हटते। शेरपुर गांव को इसी ऐतिहासिक बलिदान के कारण शहीदों का गांव कहा जाता है। ग्रामीणों के अनुसार यह गांव क्षेत्र की सबसे बड़ी ग्राम पंचायतों में से एक है और यहां 8 शहीदों तथा 99 स्वतंत्रता सेनानियों की जन्मभूमि रही है। ऐसे गौरवशाली इतिहास वाले गांव में शराब की दुकान खोले जाने की योजना से ग्रामीणों की भावनाएं आहत हुई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को चाहिए कि शेरपुर जैसे ऐतिहासिक गांव को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और इसे एक आदर्श गांव के रूप में विकसित करने की दिशा में पहल करे। लेकिन इसके उलट यहां शराब की दुकान खोलना युवाओं को नशे की ओर धकेलने जैसा कदम है। इसी को लेकर गांव के लोगों ने गाजीपुर के जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर शेरपुर में आवंटित शराब की दुकान को तत्काल निरस्त करने की मांग की है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि प्रशासन ने जल्द ही इस फैसले को वापस नहीं लिया तो वे महात्मा गांधी के बताए मार्ग पर चलते हुए लोकतांत्रिक तरीके से सत्याग्रह और शांतिपूर्ण आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

ग्रामीणों का कहना है कि शेरपुर गांव शहीदों की तपोभूमि है और यहां की पहचान त्याग, बलिदान और देशभक्ति से जुड़ी है। ऐसे में गांव में शराब की दुकान खुलने देना शहीदों की स्मृति और गांव की गरिमा के खिलाफ होगा।

 

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए इस निर्णय को तुरंत वापस लिया जाए और शेरपुर गांव के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इसे विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए विशेष योजनाएं लागू की जाएं।

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