त्योहारों से पहले चीनी ₹60 पार, स्टॉक लिमिट से जमाखोरी पर शिकंजा


विशुनपुरा। त्योहारों से पहले चीनी की बढ़ती कीमत ने आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। महज तीन सप्ताह में थोक बाजार में चीनी के दाम करीब 47 रुपये से बढ़कर 58.50 से 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं, जबकि खुदरा बाजार में उपभोक्ताओं को करीब 61 रुपये किलो तक कीमत चुकानी पड़ रही है। यानी त्योहारों की मिठास से पहले महंगाई ने घरों में दस्तक दे दी है।

बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने जमाखोरी और कृत्रिम कमी पर लगाम लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। 10 मीट्रिक टन से अधिक मासिक चीनी इस्तेमाल करने वाले डीलरों के लिए स्टॉक सीमा तय की गई है। ऐसे डीलर 15 दिनों से अधिक का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। यह व्यवस्था 1 सितंबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगी। गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली के दौरान मांग बढ़ने को देखते हुए सरकार ने यह फैसला किया है।

लेकिन कीमतों में उछाल ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या चीनी उत्पादन घटने की कीमत आम रसोई चुकाएगी? गन्ने के एक हिस्से को चीनी के बजाय इथेनॉल उत्पादन में डायवर्ट करने की नीति पर भी सवाल उठ रहे हैं। सरकार इथेनॉल मिश्रण को पेट्रोलियम आयात घटाने और किसानों की आय बढ़ाने से जोड़ती रही है, लेकिन आम उपभोक्ता पूछ रहा है कि पेट्रोल की कीमत में राहत नहीं मिली तो इसका फायदा उसकी जेब तक कितना पहुंचा?

सरकार को यह भी स्पष्ट करना होगा कि इथेनॉल नीति, चीनी की उपलब्धता और बढ़ती कीमतों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाएगा। त्योहारों में मिठाई महंगी हुई तो असर सिर्फ चीनी पर नहीं, बल्कि पूरे घरेलू बजट पर पड़ेगा। अब सवाल सिर्फ मिठास का नहीं, महंगाई से राहत का है।

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