धर्मेंद्र भारद्वाज / मऊ
मऊ में भवनों के नक्शे पास करने की व्यवस्था पर उठे सवाल, सिविल इंजीनियरों ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन
मास्टर प्लान विभाग में मैकेनिकल इंजीनियर की तैनाती पर जताई आपत्ति, नक्शा स्वीकृति में 50 प्रतिशत गिरावट का दावा
मऊ। जनपद मऊ में भवन निर्माण के नक्शों की स्वीकृति को लेकर विवाद सामने आया है। चैरिटेबल संगठन सिविल इंजीनियर एंड आर्किटेक्चर, मऊ के तत्वावधान में सिविल इंजीनियरों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मास्टर प्लान एवं भवन निर्माण कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
संगठन ने आरोप लगाया कि मास्टर प्लान विभाग में सिविल इंजीनियर की जगह मैकेनिकल इंजीनियर को जिम्मेदारी सौंपी गई है। संगठन के सदस्यों ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए भवनों के मानचित्रों की स्वीकृति प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप संचालित करने की मांग की।
नक्शा स्वीकृति में 50 प्रतिशत गिरावट का दावा
सिविल इंजीनियरों का दावा है कि पिछले वर्ष की तुलना में भवनों के मानचित्रों की स्वीकृति में लगभग 50 प्रतिशत की गिरावट आई है। संगठन ने आरोप लगाया कि विभाग में मानचित्रों की स्वीकृति रोके जाने के कारण आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और विभाग के प्रति लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
ज्ञापन में विभागीय कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए। संगठन ने आरोप लगाया कि कुछ कर्मचारी जानबूझकर ऐसी परिस्थितियां पैदा कर रहे हैं, जिससे अनुचित आर्थिक लाभ कमाने की कोशिश की जा सके। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मैकेनिकल इंजीनियर की भूमिका पर उठाए सवाल
संगठन ने आरोप लगाया कि लोक निर्माण विभाग (PWD) में तैनात मैकेनिकल इंजीनियर द्वारा भवनों के नक्शे स्वीकृत किए जा रहे हैं। इसे लेकर संगठन ने ऐसी स्वीकृतियों की वैधता और संबंधित अधिकारी की तकनीकी पात्रता पर सवाल उठाए हैं।
संगठन का कहना है कि भवन निर्माण के मानचित्रों की स्वीकृति जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में निर्धारित नियमों और तकनीकी योग्यता का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
योग्य अधिकारी की तैनाती की मांग
चैरिटेबल सिविल इंजीनियर संगठन ने जिलाधिकारी से मांग की है कि मऊ के मास्टर प्लान एवं भवन निर्माण कार्यालय में तत्काल प्रभाव से नियमानुसार योग्य सिविल इंजीनियर अथवा अधिकृत टाउन प्लानिंग अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी जाए।
संगठन का कहना है कि इससे भवन निर्माण और नक्शा स्वीकृति की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी तथा आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिल सकेगी।
इस संबंध में संगठन के जिलाध्यक्ष जाहिद हसन और महेंद्र शर्मा ने अपना पक्ष रखते हुए विभागीय व्यवस्था में सुधार की मांग की। अब इस मामले में जिला प्रशासन और संबंधित विभाग का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
