ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ्तार, खाद्य प्रसंस्करण की 10 इकाइयों को हरी झंडी 16 प्रस्तावों में 10 को एसएलईसी के लिए संस्तुति, कुशीनगर समेत सात जिलों में लगेंगी नई इकाइयां; स्थानीय किसानों को मिलेगा बाजार


ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ्तार, खाद्य प्रसंस्करण की 10 इकाइयों को हरी झंडी
16 प्रस्तावों में 10 को एसएलईसी के लिए संस्तुति, कुशीनगर समेत सात जिलों में लगेंगी नई इकाइयां; स्थानीय किसानों को मिलेगा बाजार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के तहत शुक्रवार को हुई अप्रेजल समिति की बैठक में प्रदेशभर से प्राप्त 16 नवीन प्रस्तावों में से 10 पूर्ण प्रस्तावों को राज्य स्तरीय अधिकार प्राप्त समिति (एसएलईसी) के समक्ष भेजने की संस्तुति की गई। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश, रोजगार और कृषि उपज के मूल्य संवर्धन को गति मिलने की उम्मीद है।
अपर मुख्य सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण बीएल मीणा की अध्यक्षता में ऑनलाइन हुई बैठक में प्रस्तावों का बारीकी से परीक्षण किया गया। स्वीकृत प्रस्ताव पीलीभीत, बरेली, आगरा, सीतापुर, हाथरस, कानपुर नगर और कुशीनगर जिलों से संबंधित हैं। इनमें दाल, पापड़, स्नैक्स, नमकीन, मल्टीग्रेन आटा, मैक्रोनी, पास्ता, सॉस और गुड़ निर्माण की नई इकाइयों की स्थापना तथा कुछ इकाइयों के विस्तार के प्रस्ताव शामिल हैं। ऊर्जा संरक्षण के लिए सोलर पावर प्लांट लगाने का प्रस्ताव भी इसमें शामिल है।
इन इकाइयों के लिए कच्चे माल की आपूर्ति स्थानीय किसानों से कराने की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है। विभाग के अनुसार प्रत्येक इकाई से न्यूनतम 100 किसानों को सीधे लाभ मिलने की संभावना है। इससे किसानों को अपनी कृषि उपज का स्थानीय स्तर पर बाजार मिलने के साथ मूल्य संवर्धन का लाभ भी मिल सकेगा।
अपर मुख्य सचिव बीएल मीणा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों का विकास ही प्रदेश के समग्र विकास का आधार है। खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना से स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
बैठक में इकाइयों को कच्चे माल की उपलब्धता, उत्पादन क्षमता, पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र तथा अन्य वैधानिक अनुमतियों से संबंधित अभिलेख निर्धारित समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने प्रस्तावों के जरिए प्रदेश में निवेश और कृषि उपज के स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन की संभावनाओं पर भी चर्चा की।

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