प्रशासनिक जांच: सादात में 90 साल पुराना संस्कृत महाविद्यालय गिराए जाने के मामले में एडीएम और एसडीएम ने किया स्थलीय निरीक्षण


सादात (गाजीपुर)। सादात नगर पंचायत के वार्ड नंबर नौ में स्थित करीब 90 साल पुराने (निर्माण वर्ष 1937) अनुदानित संस्कृत महाविद्यालय के भवन को प्रशासन द्वारा ढहाए जाने और उस भूमि पर नगर पंचायत कार्यालय बनाए जाने के विवाद ने तूल पकड़ लिया है। इस चर्चित मामले की जांच के लिए जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित टीम के सदस्य अपर जिलाधिकारी (भू.रा.) सुनील त्रिवेदी और सैदपुर एसडीएम सुश्री ज्योति चौरसिया रविवार को सादात पहुंचे।

जांच टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने संस्कृत महाविद्यालय के प्रबंधक योगेश्वर प्रसाद और आसपास के स्थानीय निवासियों से गहन पूछताछ की। प्रबंधक योगेश्वर प्रसाद ने जांच टीम के समक्ष विद्यालय की भूमि और स्वामित्व से जुड़े आवश्यक कानूनी दस्तावेज प्रस्तुत किए।स्थानीय निवासियों और ग्रामीणों ने दर्ज कराए बयान….

मौके पर मौजूद नगर निवासी शिवानन्द सिंह मुन्ना, विजेन्द्र प्रताप सिंह (ससना), ब्रजनाथ उर्फ साधु यादव (हरदिया), पूर्व प्रधानाचार्य रामधनी शर्मा, सुदामा राम विश्वकर्मा, बैकुंठ सिंह, मनीष यादव, प्रदीप सिंह, अंजनी कुमार, उमेश सिंह और पलकधारी राजभर सहित अन्य ग्रामीणों ने जांच अधिकारियों को स्पष्ट रूप से बताया कि जिस भूमि पर नगर पंचायत का नया कार्यालय भवन बनाया जा रहा है, वहां पिछले कई दशकों से संस्कृत महाविद्यालय का सफलतापूर्वक संचालन हो रहा था। जांच अधिकारियों ने प्रबंधक द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और ग्रामीणों के बयानों को संकलित कर लिया है और इसकी विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी को प्रेषित करने की बात कही है।

भाजपा जिलाध्यक्ष और वरिष्ठ नेताओं ने भी जताया विरोध…

इससे पूर्व, शनिवार को भाजपा जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश राय और वरिष्ठ भाजपा नेता सच्चिदानंद सिंह ने भी इस विवादित स्थल का दौरा किया था। जिलाध्यक्ष ने मौके पर मौजूद जखनियां के नायब तहसीलदार विवेकानंद सिंह और हल्का लेखपाल से मामले की जानकारी ली। उन्होंने संस्कृत महाविद्यालय की भूमि पर नगर पंचायत कार्यालय बनाए जाने का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति की भाषा संस्कृत के इस ऐतिहासिक महाविद्यालय की भूमि को हर हाल में सुरक्षित किया जाना चाहिए।

क्या है पूरा मामला?….

सादात नगर पंचायत के वार्ड नौ में स्थित इस संस्कृत महाविद्यालय का निर्माण वर्ष 1937 में स्वर्गीय रामशरण राम ने करवाया था। यह भूखंड आबादी की जमीन में आता है, जिस पर सरकार द्वारा अनुदानित यह संस्कृत विद्यालय दशकों से चल रहा है।

अवैध निर्माण और अदालती कार्यवाही: विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य हामिद सिद्दीकी और प्रबंधक योगेश्वर प्रसाद ने बताया कि वर्तमान में भी विद्यालय में छात्र पंजीकृत हैं। नगर पंचायत सादात प्रशासन द्वारा किए जा रहे इस निर्माण को ‘अवैध’ बताते हुए न्यायालय में याचिका भी दाखिल की गई है।

स्वामित्व का नियम: नियमानुसार, शासनादेश के मुताबिक श्रेणी 6-2 की भूमि पर जमींदारी उन्मूलन से पहले जिसका कब्जा होगा, उसका स्वामित्व उसी कब्जेदार में निहित होता है।

शासनादेशों का उल्लंघन: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव दुर्गा शंकर पांडेय और सुधीर गर्ग द्वारा पूर्व में स्पष्ट आदेश दिए गए हैं कि यदि कोई मामला कोर्ट में विचाराधीन (सब-जूडिस) हो, तो उसमें प्रशासनिक हस्तक्षेप न किया जाए।

इसके बावजूद, बीते 16 सितंबर को जखनियां के तत्कालीन एसडीएम अतुल कुमार ने मौके पर उपस्थित होकर कार्यदाई संस्था सीएनडीएस के अभियंता अभिलाष पाण्डेय और ठेकेदार राकेश सिंह को निर्माण कार्य शुरू करने का निर्देश दिया था। एसडीएम के इसी आदेश के बाद भारी पुलिस बल की मौजूदगी में संस्कृत महाविद्यालय की चहारदीवारी और कमरों को पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया था, जिसके बाद से ही क्षेत्र में तनाव और आक्रोश का माहौल है। अब देखना यह है कि एडीएम और एसडीएम की इस संयुक्त जांच रिपोर्ट के बाद जिलाधिकारी इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं।

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