सेवराई (गाजीपुर)। बैनामा से पहले भूमि के अंश निर्धारण एवं क्रेता व विक्रेता से संबंधित विवाद को लेकर बार एसोसिएशन तहसील सेवराई ने जिलाधिकारी गाजीपुर एवं उपजिलाधिकारी सेवराई को ज्ञापन सौंपकर जिलाधिकारी के आदेश को वापस लेने की मांग करते हुए बुधवार को दूसरे दिन भी अधिवक्ताओं ने रजिस्ट्री संबंधी न्यायिक कार्यों का बहिष्कार जारी रखा। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट पारस राम एवं महासचिव सुमंत सिंह कुशवाहा के हस्ताक्षर से जारी ज्ञापन में कहा गया है कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया तो बड़ा आंदोलन करने के लिए बाध्य होगे।
ज्ञापन में कहा गया है कि जिलाधिकारी के 5 अगस्त के संबंध में अधिवक्तागण एवं वसीका नवीसों के मध्य विवाद उत्पन्न हुआ है। बार एसोसिएशन का आरोप है कि उक्त आदेश विधि एवं व्यावहारिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है। अधिवक्ताओं ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि आदेश वापस नहीं लिए जाने की स्थिति में आंदोलन किया जाएगा।
बार एसोसिएशन ने अपने ज्ञापन में तीन प्रमुख मांगें उठाई हैं। पहली मांग में कहा गया है कि भूमि के प्रतिफल का निर्धारण क्रेता एवं विक्रेता की सहमति से होता है। जमीन की स्थिति, उपयोगिता एवं बाजार मूल्य के आधार पर प्रतिफल तय किया जाता है। अधिवक्ताओं का कहना है कि कई ऐसी जमीनें हैं जिनका बाजार मूल्य निर्धारित सर्किल रेट से अधिक होता है, जबकि कुछ भूमि की स्थिति एवं उपयोगिता के कारण उनका वास्तविक बाजार मूल्य कम भी हो सकता है। ऐसी परिस्थितियों में केवल निर्धारित दर के आधार पर भूमि के मूल्य का आकलन करना व्यवहारिक नहीं है। इसलिए संबंधित आदेश को विधि विरुद्ध एवं अव्यावहारिक बताते हुए वापस लेने की मांग की गई है। खतौनी में अंश निर्धारण को लेकर सवाल उठाते हुए बार एसोसिएशन ने कहा कि अंश निर्धारण शासन एवं राजस्व विभाग के स्तर का कार्य है और इसमें सही अंश का निर्धारण सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि बैनामा एवं अन्य राजस्व संबंधी कार्य सही ढंग से संपादित हो सकें। ज्ञापन में दावा किया गया है कि जनपद गाजीपुर में अब तक हुए अंश निर्धारण में करीब 70 प्रतिशत तक त्रुटियां हैं। ऐसी स्थिति में अंश निर्धारण की कमी के आधार पर बैनामा रोकना उचित नहीं है। अधिवक्ताओं ने प्रशासन से इस समस्या का पहले समाधान कराने की मांग की है। वही 72 घंटे के भीतर तहसील प्रशासन द्वारा जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश को भी कठोर एवं अव्यावहारिक बताया गया है। बार एसोसिएशन का कहना है कि इतने कम समय में जांच की प्रक्रिया पूरी करने से कार्य की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और इसका अतिरिक्त आर्थिक भार आम जनता पर पड़ सकता है। अधिवक्ताओं ने कहा कि ऐसे आदेश से जनता को अनावश्यक परेशानी के साथ अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करना पड़ सकता है तथा सरकारी कोष को भी अपूरणीय क्षति होने की आशंका है।
ज्ञापन की प्रतिलिपि स्टाम्प एवं पंजीयन मंत्री, उत्तर प्रदेश शासन, कलेक्टर बार एसोसिएशन गाजीपुर, समस्त बार एसोसिएशन गाजीपुर, समस्त न्यायालय तहसील सेवराई एवं उपनिबंधक सेवराई को भी भेजी गई है। बार एसोसिएशन ने प्रशासन से जनहित एवं न्यायहित में आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की है।
इस मौके पर संजीव सिंह, अय्याज खान, हैदर खां,मु0 शाहजहां, भोला यादव आदि अधिवक्ता शामिल रहे।
