अतिक्रमण की चपेट में वीरपुर पंप कैनाल, सिंचाई संकट से जूझ रहे किसान


भांवरकोल। क्षेत्र की इकलौती सिंचाई परियोजना वीरपुर पंप कैनाल आज अतिक्रमण, गंदगी और विभागीय उपेक्षा की मार झेल रही है। लगभग पांच दशक पूर्व किसानों की सिंचाई सुविधा के लिए बनाई गई यह नहर वीरपुर से बाठा गांव तक करीब 12.400 किलोमीटर लंबी है, लेकिन वर्तमान में इसका पानी महज पांच किलोमीटर तक ही पहुंच पा रहा है। नतीजतन नहर के टेल क्षेत्र में आने वाले गांवों के किसान वर्षों से सिंचाई संकट का सामना कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, वीरपुर पंप कैनाल का निर्माण क्षेत्र की हजारों एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कराया गया था। इस परियोजना के तहत मुख्य नहर के साथ-साथ चार माइनर नहरों का भी निर्माण किया गया था, ताकि दूर-दराज के खेतों तक पानी पहुंच सके। शुरुआती वर्षों में इस नहर से किसानों को काफी लाभ मिला, लेकिन समय के साथ इसकी सफाई और रखरखाव पर ध्यान नहीं दिए जाने से स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई।

ग्रामीणों का आरोप है कि नहर की नियमित सफाई नहीं होने के कारण उसमें भारी मात्रा में गाद, झाड़ियां और जलकुंभी जमा हो गई हैं। वहीं कई स्थानों पर लोगों ने नहर में मिट्टी डालकर स्थायी और अस्थायी रास्ते बना लिए हैं। वीरपुर, बदौली, मिर्जाबाद, धनेठा और बाठा गांव के आसपास नहर पर कई जगह अतिक्रमण कर लिया गया है, जिससे पानी का प्रवाह बाधित हो रहा है।

धनेठा और बाठा गांव के किसानों का कहना है कि पिछले लगभग 25 वर्षों से उनके क्षेत्र तक नहर का पानी नहीं पहुंचा है। किसानों के अनुसार नहर में पानी बीच रास्ते में ही रुक जाता है और टेल तक पहुंचने से पहले ही खत्म हो जाता है। इसके कारण उन्हें निजी नलकूपों और डीजल पंपों के सहारे सिंचाई करनी पड़ती है, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है।

किसानों का कहना है कि खरीफ और रबी दोनों मौसम में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी न मिलने से फसल उत्पादन प्रभावित हो रहा है। कई बार सिंचाई विभाग और प्रशासन को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि कुछ स्थानों पर घरों और नालियों का गंदा पानी भी सीधे नहर में छोड़ा जा रहा है। इससे न केवल जल प्रवाह प्रभावित हो रहा है, बल्कि नहर का अस्तित्व भी खतरे में पड़ता जा रहा है। यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाया गया और नहर की सफाई नहीं कराई गई, तो आने वाले वर्षों में यह पूरी परियोजना बेकार हो सकती है। इस संबंध में लघुडाल विभाग के सहायक अभियंता रवि कुमार यादव ने बताया कि नहर पर हुए अतिक्रमण की जानकारी संबंधित विभागों और प्रशासन को भेज दी गई है। जल्द ही स्थलीय निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए अतिक्रमण हटाने और नहर को सुचारु करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। क्षेत्रीय किसानों ने जिला प्रशासन, सिंचाई विभाग और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि वीरपुर पंप कैनाल को अतिक्रमण मुक्त कर उसकी व्यापक सफाई कराई जाए, ताकि पांच दशक पुरानी यह महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजना फिर से किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सके।

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