नंदगंज(ग़ाज़ीपुर)। आगामी 20 मई को प्रस्तावित “एक दिवसीय ऑनलाइन बंदी” को लेकर जनपद में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इस बीच रिटेल केमिस्ट एंड डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन के प्रदेश संगठन मंत्री पुनीत सिंघल और ड्रग डीलर्स वेलफेयर सोसायटी ग़ाज़ीपुर के महामंत्री अश्वनी राय ने संयुक्त रूप से सभी कैमिस्ट बंधुओं से इस बंदी में शामिल न होने की अपील की है।
दोनों पदाधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार की एक दिवसीय बंदी का कोई ठोस औचित्य नहीं है। उनका कहना है कि ऑनलाइन दवा व्यापार के पीछे बड़े कॉर्पोरेट घरानों और प्रभावशाली लोगों की सीधी भागीदारी है, ऐसे में एक दिन के विरोध से उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला है। इसके विपरीत, मेडिकल स्टोर संचालकों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि एक दिन दुकान बंद रखने का मतलब है हजारों रुपये का व्यापारिक घाटा, साथ ही कर्मचारियों का वेतन और दुकान का किराया जैसी जिम्मेदारियां भी प्रभावित होंगी। इसके अलावा सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जरूरतमंद मरीजों को समय पर दवाएं नहीं मिल पाएंगी, जिससे उनकी परेशानी बढ़ेगी और समाज में कैमिस्टों की सेवा भावना पर भी सवाल उठ सकते हैं।
सिंघल और राय ने यह भी सवाल खड़ा किया कि जिले में संचालित जन औषधि केंद्रों और नर्सिंग होम के भीतर चल रही दवा दुकानों को इस प्रस्तावित बंदी से बाहर क्यों रखा गया है। उन्होंने कहा कि क्या ये संस्थान ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1945 के नियमों से अलग हैं, इस पर स्पष्टता होनी चाहिए।
उन्होंने कैमिस्टों से अपील करते हुए कहा कि भावनात्मक रूप से निर्णय लेने के बजाय अपने हितों को ध्यान में रखते हुए विवेकपूर्ण निर्णय लें। उनका कहना है कि इस प्रकार की प्रतीकात्मक बंदी से न तो सरकार पर दबाव बनेगा और न ही ऑनलाइन कंपनियों पर कोई असर पड़ेगा, बल्कि इससे अपने ही व्यापार को नुकसान होगा।
दोनों संगठनों ने संयुक्त रूप से सभी मेडिकल स्टोर संचालकों से अनुरोध किया है कि 20 मई 2026 को अपनी दुकानें पूर्व की तरह खुली रखें और अपने व्यवसाय, कर्मचारियों तथा परिवार के हितों की रक्षा करें।
अंत में उन्होंने कहा कि ऑनलाइन व्यापार के खिलाफ लड़ाई एक दिन में नहीं जीती जा सकती। इसके लिए संगठित होकर कानूनी, प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर दीर्घकालिक प्रयास करने होंगे। उन्होंने सभी से मरीजों की सेवा को सर्वोपरि मानते हुए कार्य करने का आह्वान किया और कहा— “रोगी सेवा ही हमारा धर्म है।”
