सादात – गाज़ीपुर
सलेमपुर बघाई में अखिल भारतीय आध्यात्मिक और सामाजिक संस्था मानव उत्थान सेवा समिति द्वारा आयोजित सात दिवसीय ‘श्रीमद् भागवत सद्भावना सत्संग ज्ञानयज्ञ’ का चौथा दिन जारी है। इस अवसर पर प्रयागराज से पधारे मुख्य वक्ता पूज्य महात्मा सारथानंद ने कहा कि मानव जीवन का एकमात्र उद्देश्य परमात्मा की प्राप्ति करना है।
महात्मा सारथानंद ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि भगवान का अवतरण धरती पर विशेष कार्य के लिए होता है। जब मनुष्य सन्मार्ग छोड़कर कुमार्ग अपनाता है और धर्म को त्यागकर अधर्म का मार्ग चुनता है, तब महापुरुष भक्तों की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए साकार रूप में आते हैं। इस दौरान सभी ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की बधाई गाकर खुशियां मनाईं।
डॉ. संतोष कुमार यादव के सौजन्य से आयोजित इस ज्ञानयज्ञ में वाराणसी से आईं महात्मा सुजाता बाई जी ने संत समागम के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डॉ. संतोष यादव तो केवल एक माध्यम हैं, यहां संतों का जो समागम चल रहा है, वह अत्यंत दुर्लभ है। संत शिरोमणि तुलसीदास ने भी श्रीरामचरितमानस में लिखा है कि “संत समागम हरि-कथा, तुलसी दुर्लभ दोय”, जिसका अर्थ है कि कलयुग में संत का मिलना और भगवान की कथा सुनना दुर्लभ है, जो हमें सदगुरुदेव भगवान की कृपा से सुलभ हो रहा है।
इस आध्यात्मिक आयोजन में श्रीराम नगरी अयोध्या से पधारी पूज्य महात्मा दर्शनी बाई, फतेहपुर से महात्मा आत्मगीतानंद, अमेठी से महात्मा चंद्रकेशवानंद, लखीमपुर खीरी से महात्मा सत्यवती बाई और गाजीपुर से महात्मा दयावती बाई ने भी अपने आत्म कल्याणकारी प्रवचनों से पांडाल में उपस्थित भक्तों को लाभान्वित किया।
कार्यक्रम में रामाश्रय सिंह यादव, अनिरुद्ध सिंह, संदीप त्रिपाठी, संदीप रघुवंशी, शिवशंकर यादव, बलिराम कनौजिया, दिनेश यादव, सुनील सोनकर, अरविन्द कुमार यादव सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। समिति के शाखा कार्यकर्ता और मानव सेवा दल के स्वयंसेवक भी सक्रिय रूप से सेवा कार्य में लगे रहे। पूजन अर्चन और प्रवचन कार्य में आचार्य सुनील पाण्डेय रेवती, आचार्य रजनीश उपाध्याय, पंडित अमन तिवारी, पंडित आशुतोष पाण्डेय, वेदाचार्य आशीष उपाध्याय, वेदविभूषण पंकज ओझा और गोलू मिश्रा ने सहयोग किया। मंच संचालन डॉ. संतोष कुमार यादव ने किया।
