संवाददाता – त्रिलोकी नाथ राय
गाजीपुर। आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा एवं भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ जारी संघर्ष में एक महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हुई है। अपने वृद्ध एवं अस्वस्थ पिता के साथ मेडिकल कॉलेज गाजीपुर अस्पताल प्रशासन द्वारा कथित रूप से किए गए अमानवीय व्यवहार, अपमान एवं अवैध रूप से रोके जाने के विरुद्ध न्याय की लंबी लड़ाई लड़ रहे उमेश श्रीवास्तव की आवाज अब न्यायालय तक प्रभावी रूप से पहुंची है।
इस प्रकरण में प्रखर अधिवक्ता मारुति कुमार राय (एडवोकेट), जो सदैव गरीबों, शोषितों एवं मजलूमों के अधिकारों की लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाते रहे हैं, ने परिवादी के तरफ से परिवाद प्रस्तुत कर पूरे मामले को विधिक रूप से न्यायालय के समक्ष रखा। परिवाद में आरोप लगाया गया कि वीआईपी संस्कृति के प्रभाव में आकर अस्पताल प्रशासन ने सांसद अफजाल अंसारी को बेड उपलब्ध करवाने के लिए उस पर पहले से भर्ती एक वृद्ध एवं बीमार व्यक्ति के साथ न केवल अमानवीय व्यवहार किया, बल्कि उन्हें अपमानित करते हुए घसीटा गया तथा बिना उचित कारण के रोककर रखा गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय द्वारा विस्तृत जांच कराई गई। लंबी न्यायालयीन प्रक्रिया और तथ्यों के परीक्षण के उपरांत विद्वान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, गाजीपुर ने प्रथम दृष्टया आरोपों को गंभीर मानते हुए संबंधित अभियुक्तगण—मेडिकल कॉलेज गाजीपुर के तत्कालीन चिकित्सक डॉ. माजिद उपप्राचार्य महर्षि विश्वामित्र मेडिकल कॉलेज गाजीपुर डॉ नीरज एवं अस्पताल के स्टॉफ वारिस —को विचारण (ट्रायल) हेतु तलब करने का आदेश पारित किया है।
यह आदेश न केवल पीड़ित पक्ष के लिए राहत का विषय है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि न्यायपालिका भ्रष्टाचार, पक्षपात एवं वीआईपी संस्कृति के दुरुपयोग के विरुद्ध संवेदनशील और प्रतिबद्ध है। इस निर्णय से आम जनमानस में यह विश्वास और सुदृढ़ हुआ है कि अन्याय के विरुद्ध यदि दृढ़ता से संघर्ष किया जाए तो न्याय अवश्य मिलता है।
अधिवक्ता श्री मारुति कुमार राय ने कहा कि यह लड़ाई केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक उस नागरिक की है जो व्यवस्था के दमन का शिकार होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी वे अन्याय एवं भ्रष्टाचार के विरुद्ध इसी प्रकार मजबूती से खड़े रहेंगे।
यह प्रकरण समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है कि कानून के समक्ष सभी समान हैं और किसी भी प्रकार की वीआईपी संस्कृति या प्रभाव के आधार पर किसी के साथ अन्याय स्वीकार नहीं किया जाएगा।
