बीमारी उम्र नहीं देखती, इलाज का अधिकार जरुरतमंदों का बुनियादी अधिकार : निसार अहमद
परिवार की गिनती और उम्र की बंदिशें हटीं,हर जरूरतमंद को मिले आयुष्मान कार्ड का लाभ : निसार अहमद
रतनपुरा,मऊ।आयुष्मान भारत योजना गरीबों और जरूरतमंदों के लिए इलाज की उम्मीद है, लेकिन पात्रता के मानकों के कारण अनेक वास्तविक जरूरतमंद इस सुविधा से वंचित हैं। सरकार को इस गंभीर समस्या का तत्काल समाधान करना चाहिए।
समाजवादी जन चिंतक निसार अहमद ने कहा कि समाज में बहुत से लोग अकेले रहते हैं और अनेक परिवार दो, तीन या चार सदस्यों वाले हैं। केवल इसलिए किसी गरीब परिवार को इलाज के अधिकार से वंचित करना कि उसमें छह सदस्य नहीं हैं, न्यायसंगत नहीं है। बीमारी परिवार की संख्या देखकर नहीं आती और इलाज की जरूरत भी सदस्यों की गिनती से तय नहीं हो सकती।
बातचीत मे निसार अहमद ने कहा कि 50 से 69 वर्ष की उम्र के अनेक लोग गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। इनमें आर्थिक रूप से कमजोर युवा और अन्य जरूरतमंद भी शामिल हैं, जो महंगे इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ हैं। ऐसे लोगों की स्वास्थ्य सुरक्षा की सरकार को गंभीरता से चिंता करनी चाहिए। 70 वर्ष की आयु वाले नियम को शिथिल किया जाए, ताकि गंभीर बीमारी से जूझ रहे जरूरतमंद लोग इलाज से वंचित न रहें।
निसार अहमद ने कहा कि यदि 2011 की सूची में वास्तविक गरीब और पात्र परिवारों के नाम छूट गए हैं, तो सरकार को इसकी निष्पक्ष समीक्षा करनी चाहिए। पुरानी सूची को गरीब के इलाज की राह में बाधा नहीं बनने दिया जा सकता। पात्रता सूची को जमीनी वास्तविकता के आधार पर दुरुस्त कर वास्तविक जरूरतमंदों को योजना से जोड़ा जाए।
पूछे गए एक सवाल के जवाब में निसार अहमद ने कहा, “रोटी, कपड़ा और मकान के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए, न कि ऐसे नियमों की बंदिशें जो जरूरतमंदों को उनके अधिकार से वंचित कर दें। सरकारी योजनाओं का उद्देश्य इंसान की जिंदगी आसान बनाना है, उसे नियमों में उलझाना नहीं।
