पंचायत सहायकों ने पांच सूत्रीय मांगों को लेकर शासन को दिया अल्टीमेटम


धर्मेन्द्र भारद्वाज | मऊ

एक सप्ताह में निर्णय नहीं हुआ तो 7 सितंबर से लखनऊ में अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी

मऊ। पंचायत सहायकों के मानदेय बढ़ोतरी और स्थायीकरण समेत पांच प्रमुख मांगों को लेकर पंचायत सहायक कर्मचारी यूनियन उत्तर प्रदेश ने शासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यूनियन ने मुख्यमंत्री एवं जिलाधिकारी को संबोधित मांग पत्र भेजकर मांगों के शीघ्र निस्तारण की मांग की है और एक सप्ताह के भीतर सकारात्मक निर्णय नहीं होने पर 7 सितंबर से लखनऊ में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी है।

यूनियन पदाधिकारियों का कहना है कि पंचायत सहायकों की समस्याओं को लेकर इससे पहले 1 जून 2026 को भी मांग पत्र दिया गया था। इसके बाद 3 जून को पंचायत सहायकों के प्रतिनिधिमंडल की शासन स्तर पर वार्ता हुई थी। यूनियन के अनुसार, वार्ता के दौरान मांगों के समाधान के लिए दो माह का समय मांगा गया था, लेकिन तय अवधि बीतने के बावजूद मानदेय वृद्धि और स्थायीकरण से संबंधित कोई सकारात्मक आदेश जारी नहीं किया गया।

यूनियन की ये हैं पांच प्रमुख मांगें

यूनियन ने मुख्यमंत्री से पंचायत सहायकों के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात कराने की मांग की है। साथ ही पंचायत सहायकों का मानदेय बढ़ाकर ग्राम पंचायत सचिव के समकक्ष 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने अथवा कम से कम प्रदेश में निर्धारित न्यूनतम कुशल मजदूरी दर के बराबर मानदेय देने की मांग उठाई गई है।

इसके अलावा पंचायत सहायकों की अनुबंध और संविदा प्रक्रिया समाप्त कर स्थायी सेवा नियमावली बनाने तथा उन्हें राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग की गई है। महिला पंचायत सहायकों के लिए मातृत्व अवकाश की सुविधा और स्थानांतरण एवं समायोजन नीति लागू करने की भी मांग रखी गई है।

यूनियन ने पंचायत सहायकों के अनुभव और कार्य को देखते हुए आगामी ग्राम विकास अधिकारी एवं ग्राम पंचायत अधिकारी की भर्ती में 50 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई है।

7 सितंबर से आंदोलन की चेतावनी

यूनियन ने शासन से पांचों मांगों पर एक सप्ताह के भीतर सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित अवधि में मांगों का समाधान नहीं किया गया तो प्रदेशभर के पंचायत सहायक 7 सितंबर 2026 से लखनऊ स्थित ईको गार्डन में अनिश्चितकालीन विशाल धरना-प्रदर्शन शुरू करने के लिए बाध्य होंगे।

यूनियन ने स्पष्ट कहा है कि आंदोलन की स्थिति उत्पन्न होने पर इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

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