धर्मेन्द्र भारद्वाज | मऊ
डीएम ने दत्तक माता-पिता को सौंपा मासूम, ‘राजवीर जायसवाल’ के नाम से शुरू हुई नई जिंदगी
मऊ। करीब साढ़े आठ महीने पहले गंभीर रूप से घायल और लावारिस हालत में मिले एक नवजात को आखिरकार अपना परिवार मिल गया। चाइल्ड हेल्पलाइन, स्वास्थ्य विभाग, बाल संरक्षण तंत्र और राजकीय विशिष्ट दत्तक ग्रहण अभिकरण के संयुक्त प्रयासों से मासूम को न केवल जीवनदान मिला, बल्कि अब उसे माता-पिता का स्नेह और सुरक्षित भविष्य भी मिल गया है।
जानकारी के अनुसार, 1 दिसंबर 2025 को थाना मुहम्मदाबाद गोहना क्षेत्र में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के पास एक नवजात शिशु लावारिस अवस्था में मिला था। उसके शरीर और सिर पर गंभीर चोटें थीं तथा सिर से लगातार रक्तस्राव हो रहा था। सूचना मिलने पर चाइल्ड हेल्पलाइन (1098), मऊ ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए नवजात को सुरक्षित संरक्षण में लिया और उपचार की व्यवस्था कराई।
चिकित्सकीय उपचार, निरंतर देखभाल और संरक्षण के बीच मासूम ने मुश्किल हालात से जूझते हुए धीरे-धीरे स्वास्थ्य लाभ किया। इसके बाद बच्चे के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए नियमानुसार आवश्यक विधिक और दत्तक ग्रहण संबंधी प्रक्रियाएं पूरी की गईं।
14 अगस्त 2026 को दत्तक ग्रहण की विधिक प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद जिलाधिकारी आनन्द वर्द्धन ने बालक को उसके नए परिवार को सौंपा। दत्तक माता-पिता अर्चना जायसवाल और अमर जायसवाल ने मासूम को नया नाम ‘राजवीर जायसवाल’ दिया।
जिस बच्चे की जिंदगी की शुरुआत बेहद कठिन परिस्थितियों में हुई थी, अब उसे अपना घर, माता-पिता का प्यार, सुरक्षा और बेहतर भविष्य मिल गया है। यह महज एक दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, मानवता और सामूहिक प्रयास की मिसाल है।
इस अवसर पर चाइल्ड हेल्पलाइन, मऊ और राजकीय विशिष्ट दत्तक ग्रहण अभिकरण ने इस पूरी प्रक्रिया में सहयोग करने वाले सभी विभागों, अधिकारियों, कर्मचारियों और सहयोगी व्यक्तियों के प्रति आभार जताया। इस मामले ने यह संदेश भी दिया कि हर बच्चे को सुरक्षित बचपन, सम्मान, प्रेम और परिवार पाने का अधिकार है।
