सेवराई (गाजीपुर)। गहमर थाना क्षेत्र के चर्चित तिहरे हत्याकांड में जिला प्रशासन ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों के विरुद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत कार्रवाई की है। इससे पूर्व एक अन्य आरोपी पर भी एनएसए लगाया जा चुका है। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई को क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अपराधियों के खिलाफ कड़ा संदेश देने के रूप में देखा जा रहा है।
ज्ञात हो कि 24 दिसंबर 2025 को गहमर थाना क्षेत्र के पट्टी खेलू राय स्थित एक तालाब के समीप विक्की सिंह, सौरभ सिंह और अंकित सिंह की धारदार हथियारों से निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस जघन्य वारदात के बाद पूरे क्षेत्र में भय, तनाव और आक्रोश का माहौल व्याप्त हो गया था। बाजारों, शैक्षणिक संस्थानों तथा आम जनजीवन पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ा था।
घटना के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी ओम सिंह को 27 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसके बाद अमन सिंह और अरविंद सिंह उर्फ भदाकू को 1 जनवरी 2026 को पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया। मामले में नामजद अन्य अभियुक्तों को भी गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया। वहीं लखन उर्फ विकास सिंह ने 14 जनवरी 2026 तथा अमित सिंह ने 4 मई 2026 को न्यायालय में आत्मसमर्पण किया था।
घटना के बाद क्षेत्र में शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन लगातार सक्रिय रहा। संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस एवं पीएसी की तैनाती की गई तथा लगातार गश्त कराई गई। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रयासों से प्रभावित परिवारों एवं स्थानीय लोगों में सुरक्षा का भरोसा कायम करने की कोशिश की गई।
पुलिस रिपोर्ट, खुफिया सूचनाओं और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रशासन ने पाया कि आरोपियों की गतिविधियां लोक व्यवस्था एवं जनसुरक्षा के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकती हैं। इसी आधार पर 15 जून 2026 को लखन उर्फ विकास सिंह के विरुद्ध एनएसए की धारा 3(2) के तहत कार्रवाई की गई थी।
अब 29 जून 2026 को जिला प्रशासन ने अरविंद सिंह उर्फ भदाकू और अमन सिंह पर भी राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम लागू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि समाज में भय और असुरक्षा का वातावरण पैदा करने वाले तत्वों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
प्रशासन की इस कार्रवाई को तिहरे हत्याकांड के आरोपियों के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त कानूनी कार्रवाई माना जा रहा है। इससे जहां आमजन में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है, वहीं अपराधियों के बीच भी कानून का भय बढ़ा है।
