खाकी की आड़ में ‘अपराधिक षड्यंत्र’: पत्नी के प्रधानी चुनाव का कर्ज उतारने के लिए दिव्यांग छात्र को कुचलने पर उतारू इंस्पेक्टर बृजेश सिंह


वाराणसी/जौनपुर । उत्तर प्रदेश पुलिस की छवि पर एक दागी इंस्पेक्टर ने कालिख पोत दी है। जौनपुर जिले के थाना चंदवक में तैनात इंस्पेक्टर क्राइम बृजेश कुमार सिंह पर आरोप है कि उन्होंने अपनी पत्नी के ग्राम प्रधान चुनाव में मिले राजनीतिक सहयोग का एहसान चुकाने के लिए एक अपराधी को संरक्षण दिया और एक निर्दोष दिव्यांग छात्र का भविष्य 10 मिनट’ में तबाह करने की साजिश रची। यह मामला अब मानवाधिकारों के हनन और पद के दुरुपयोग का एक बड़ा उदाहरण बन गया है।

10 मिनट में करियर काला कर दूँगा– ऑडियो में खुली गुंडागर्दी की पोल

इंस्पेक्टर बृजेश सिंह की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को सौंपी गई है, जिसने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। रिकॉर्डिंग में इंस्पेक्टर को यह कहते हुए सुना जा रहा है कि

“पचासों साल लग जाते हैं इस सफेदी को लाने में… ये काला क्या है, 10 मिनट लगते हैं काला बनाने में”

यह धमकी एक विधि के छात्र सर्वेश त्रिपाठी को फर्जी मुकदमों में फंसाकर उसका पूरा जीवन बर्बाद करने की स्पष्ट मंशा को दर्शाती है।

अदालत ने पुलिस की कहानी को बताया असंभव

इस साज़िश का सबसे बड़ा खुलासा माननीय अपर सत्र न्यायाधीश वाराणसी)

के आदेश से हुआ है। इंस्पेक्टर के प्रभाव में छात्र पर मारपीट का जो मुकदमा दर्ज कराया गया था, उसे न्यायालय ने सिरे से नकार दिया। आरोपी बनाया गया छात्र सर्वेश त्रिपाठी 45 प्रतिशत शारीरिक रूप से दिव्यांग है। न्यायालय ने माना कि एक दिव्यांग व्यक्ति द्वारा मारपीट कर भागने का आरोप प्रथम दृष्टया असंभव और निराधार है। न्यायालय ने यह भी माना कि यह मुकदमा पुरानी रंजिश और द्वेष की भावना से प्रेरित होकर अकारण फंसाने के लिए दर्ज कराया गया है  इंस्पेक्टर बृजेश सिंह पर आरोप है कि उन्होंने क्षेत्राधिकार का उल्लंघन करते हुए वाराणसी पुलिस की विवेचना को हाईजैक करने की कोशिश की और विवेचकों पर अनुचित दबाव बनाया।

पत्नी की प्रधानी का कर्ज और अपराधियों का संरक्षण

शिकायतकर्ता ने मानवाधिकार आयोग को दिए पत्र में बताया कि इंस्पेक्टर बृजेश सिंह ने खुद स्वीकार किया है कि चूंकि उनकी पत्नी ग्राम प्रधान रही हैं, इसलिए वे अपने गांव के अपराधियों की पैरोकारी कर रहे हैं। एक पुलिस अधिकारी द्वारा अपराधियों का ढाल बनना उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली का घोर उल्लंघन है।

निलंबन और SIT जांच की मांग

पीड़ित पक्ष ने प्रमुख सचिव गृह और मानवाधिकार आयोग से मांग की है कि:  साक्ष्यों से छेड़छाड़ रोकने के लिए इंस्पेक्टर को तत्काल निलंबित किया जाए प्रकरण की जांच राजपत्रित अधिकारियों की SIT से कराई जाए।ऑडियो रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक जांच हो और क्षेत्राधिकार उल्लंघन की विजिलेंस जांच की जाए।

 सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उत्तर प्रदेश की योगी सरकार, जो जीरो टॉलरेंस और अपराधियों के खात्मे का दावा करती है, अपने ही विभाग के इस वर्दीधारी पर नकेल कसेगी?

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