धर्मेन्द्र भारद्वाज | मऊ
मऊ, 26 फरवरी 2026 – मऊ जिले में आज टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले सैकड़ों शिक्षकों ने टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से शुरू हुआ यह पैदल मार्च जिला कलेक्ट्रेट तक पहुंचा, जहां प्रदर्शनकारियों ने सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा।
“काला कानून वापस लो” की गूंज
मार्च के दौरान शिक्षकों ने “काला कानून वापस लो” के नारे लगाए और केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। कृष्णानंद राय, रामविलास भारती सहित बड़ी संख्या में शिक्षक इस आंदोलन में शामिल हुए।
क्या है मुख्य मांग?
प्रदर्शनकारी शिक्षकों की मांग है कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट दी जाए। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश में यह अधिनियम 27 जुलाई 2011 से प्रभावी हुआ था, और नियमों के अनुसार केवल इसके बाद नियुक्त शिक्षकों के लिए ही टीईटी अनिवार्य था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बढ़ी चिंता
शिक्षकों का आरोप है कि उच्चतम न्यायालय के 1 सितंबर 2025 के निर्णय के बाद स्थिति बदल गई है। अब देशभर में अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए भी सेवा में बने रहने या पदोन्नति पाने के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया गया है।
शिक्षकों ने इसे “वर्षों की सेवा के साथ अन्याय” बताते हुए केंद्र सरकार से अध्यादेश लाकर पुराने शिक्षकों को इस अनिवार्यता से मुक्त करने की अपील की। फेडरेशन के प्रवक्ताओं ने कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

