भांवरकोल/गाजीपुर। शेरपुर कलां गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान-यज्ञ में कथा व्यास मंजेश पांडेय ने श्रद्धालुओं को भक्ति, वैराग्य और जीव कल्याण का संदेश दिया। कथा के शुभारंभ पर पंडाल ‘राधे-राधे, श्री राधे’ के जयघोष से गूंज उठा और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
कथा व्यास ने शुकदेव जी के जन्म प्रसंग और राजा परीक्षित को मिले श्राप का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि श्रृंगी ऋषि के श्राप से सातवें दिन सर्पदंश द्वारा मृत्यु निश्चित होने पर राजा परीक्षित ने राजपाट त्याग दिया और गंगा तट पर पहुंचकर शुकदेव जी से पूछा कि मृत्यु निकट होने पर मनुष्य का कर्तव्य क्या है। इसी संवाद से श्रीमद्भागवत कथा का दिव्य प्रवाह प्रारंभ हुआ।
कथा के दौरान विदुर-मैत्रेय संवाद, भगवान विष्णु के वराह अवतार और हिरण्याक्ष वध के प्रसंग भी सुनाए गए। कथा व्यास ने कहा कि श्रद्धा और विश्वास के साथ श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण तथा उसकी शिक्षाओं को जीवन में आत्मसात करने से मनुष्य का जीवन सार्थक होता है। भागवत कथा भक्ति का मार्ग प्रशस्त करते हुए आत्मा को परमात्मा से जोड़ती है।
इस अवसर पर यजमान ओम प्रकाश राय, अजय राय, निशिथ, कल्पनाथ सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
