दर्जनों गांवों में घुसने लगा पानी, ,देवल पावर हाउस में भी पहुंचा बाढ़ का पानी, बिजली आपूर्ति ठप होने की आशंका
सेवराई (गाजीपुर)। गंगा नदी के बाद अब कर्मनाशा नदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ने लगा है। लगातार बढ़ रहे जलस्तर के कारण स्थानीय तहसील क्षेत्र के कर्मनाशा नदी के तटवर्ती गांवों में बाढ़ का खतरा गहराने लगा है। नदी का पानी गांवों की ओर बढ़ने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। वहीं खेतों में पानी भर जाने से किसानों की धान सहित विभिन्न सब्जियों की फसलें डूब गई हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान की आशंका है।
कर्मनाशा नदी के बढ़ते जलस्तर का सबसे अधिक असर नदी किनारे बसे सुरहा, अमौरा,गोड़सरा कैथी, देवल, लहना, बरेजी, सायर, राजमलबाध, पकवालिया, धनाढ़ी, खजूरी सहित आसपास के गांवों पर पड़ रहा है। नदी का पानी तेजी से गांवों की ओर बढ़ने लगा है। कई स्थानों पर खेत पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। किसानों द्वारा खेतों में लगाई गई धान, लतरा, बैंगन, मिर्च, लौकी, नेनुआ सहित अन्य सब्जियों की फसलें पानी में डूब गई हैं। खेतों में कई दिनों तक पानी जमा रहने की स्थिति में फसलों के बर्बाद होने की आशंका बढ़ गई है।
पशुओं के चारे का भी संकट
बाढ़ के पानी ने किसानों की परेशानी और बढ़ा दी है। खेतों और आसपास के क्षेत्रों में रखा तथा उगाया गया पशुओं का चारा भी पानी में डूब गया है। इससे पशुपालकों के सामने पशुओं के लिए हरे चारे की समस्या खड़ी हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नदी का जलस्तर इसी गति से बढ़ता रहा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
कर्मनाशा नदी के बाढ़ के पानी का असर सार्वजनिक एवं धार्मिक स्थलों पर भी दिखाई देने लगा है। देवल पावर उपकेंद्र, अंत्येष्टि स्थल, बाबा कीनाराम घाट तथा घटवारी माई मंदिर बाढ़ के पानी की चपेट में आ गए हैं। इन स्थानों पर पानी भरने से ग्रामीणों को आवागमन और अन्य जरूरी कार्यों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कर्मनाशा नदी का बढ़ता पानी अब देवल पावर हाउस के लिए भी खतरा बन गया है। पावर हाउस परिसर में पानी प्रवेश करने लगा है। यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा और पानी विद्युत उपकरणों तक पहुंचा तो पावर हाउस को बंद करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में क्षेत्र के दर्जनों गांवों की बिजली आपूर्ति बाधित होने की आशंका है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से कर्मनाशा नदी के बढ़ते जलस्तर पर लगातार निगरानी रखने, संवेदनशील स्थानों पर आवश्यक इंतजाम करने तथा बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने पर प्रभावित गांवों के लोगों और पशुओं के लिए सुरक्षित स्थान एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। किसानों ने बाढ़ से हुए फसल नुकसान का सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाने की भी मांग उठाई है।
