निबंधन कार्यालयों के निजीकरण के विरोध में अधिवक्ताओं की कलमबंद हड़ताल, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन


सेवराई (गाजीपुर)। निबंधन कार्यालयों के निजीकरण और ऑनलाइन व्यवस्था लागू करने के उत्तर प्रदेश सरकार के प्रस्ताव के विरोध में मंगलवार को स्थानीय बार एसोसिएशन सेवराई एवं स्टाम्प यूनियन सेवराई के बैनर तले अधिवक्ताओं, वसीकानवीसों और स्टाम्प विक्रेताओं ने पूर्ण रूप से कलमबंद हड़ताल की। हड़ताल के समर्थन में तहसील परिसर की सभी स्टाम्प विक्रेताओं और फोटोस्टेट की दुकानें भी बंद रहीं, जिससे निबंधन एवं संबंधित कार्य पूरी तरह प्रभावित रहे। बार एसोसिएशन सभागार में आयोजित संयुक्त बैठक में प्रदेश सरकार की प्रस्तावित नीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के बाद मुख्यमंत्री के नाम संबोधित पांच सूत्रीय मांगों का ज्ञापन उपजिलाधिकारी संजय यादव को सौंपा गया। अधिवक्ताओं, वसीकानवीसों और स्टाम्प विक्रेताओं ने एक स्वर में कहा कि निबंधन कार्यालयों का निजीकरण न केवल न्यायिक व्यवस्था के लिए हानिकारक होगा, बल्कि इससे लाखों लोगों की आजीविका भी संकट में पड़ जाएगी। वक्ताओं ने कहा कि यदि निबंधन कार्यालयों का संचालन निजी हाथों में सौंपा गया तो अधिवक्ता, वसीकानवीस, स्टाम्प विक्रेता तथा इस व्यवस्था से जुड़े अन्य लोगों के सामने रोजगार का गंभीर संकट उत्पन्न हो जाएगा। उन्होंने सरकार से इस प्रस्ताव को तत्काल वापस लेने की मांग की। बैठक में धारा-34 के नामांतरण मामलों में तहसीलदार और नायब तहसीलदार द्वारा कथित रूप से विधिक प्रक्रिया पूरी किए बिना आदेश पारित किए जाने पर भी नाराजगी व्यक्त की गई। अधिवक्ताओं ने इसे न्यायिक प्रक्रिया और विधि सम्मत व्यवस्था के विपरीत बताते हुए ऐसे मामलों में पारदर्शिता और कानून के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की। ज्ञापन में निबंधन कार्यालयों के निजीकरण संबंधी प्रस्ताव को निरस्त करने के साथ-साथ जनपद एवं तहसील स्तर पर ई-लाइब्रेरी की स्थापना, सभी तहसील न्यायालयों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने, वरिष्ठ अधिवक्ताओं के लिए पेंशन योजना लागू करने तथा नवोदित अधिवक्ताओं को प्रतिमाह पांच हजार रुपये भत्ता दिए जाने की मांग की गई। इसके अलावा अधिवक्ताओं, वसीकानवीसों और स्टाम्प विक्रेताओं को आयुष्मान कार्ड योजना का लाभ प्रदान करने, अधिवक्ता कल्याण के लिए भवन निर्माण तथा पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि अधिवक्ताओं के सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा से जुड़े इन मुद्दों का समाधान सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया और निजीकरण की प्रक्रिया वापस नहीं ली गई तो आंदोलन को प्रदेश स्तर पर और व्यापक रूप दिया जाएगा। इस अवसर पर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पारस राम, महासचिव सुमंत सिंह कुशवाहा, एडवोकेट अयाज अहमद खान, अमरनाथ राम, हैदर अली खान, बृजेश यादव, मोहनलाल चौधरी, जितेंद्र राम, अंगद कुशवाहा, पूनम यादव, मृत्युंजय सिंह, जितेंद्र उपाध्यक्ष, संजीव सिंह सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता, वसीकानवीस एवं स्टाम्प विक्रेता उपस्थित रहे।

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