भांवरकोल। किसानों की सिंचाई व्यवस्था मजबूत करने के उद्देश्य से करीब छह दशक पहले बनाई गई वीरपुर लघुडाल नहर आज विभागीय लापरवाही और अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुकी है। हालत यह है कि पिछले लगभग बीस वर्षों से नहर का पानी अंतिम छोर धनेठा और बाठा गांव तक नहीं पहुंच पा रहा है। टेल क्षेत्र के किसान हर साल सिंचाई के लिए परेशान होते हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों का उदासीन रवैया किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ा रहा है। करीब 12.400 किलोमीटर लंबी वीरपुर पंप नहर कभी क्षेत्र के किसानों के लिए जीवनरेखा मानी जाती थी, लेकिन अब जगह-जगह अतिक्रमण और गंदगी के कारण इसका अस्तित्व संकट में पड़ गया है। ग्रामीणों द्वारा कई स्थानों पर नहर में मिट्टी डालकर रास्ता बना दिया गया है, जिससे पानी का बहाव पूरी तरह बाधित हो रहा है। इसके अलावा कुछ गांवों में घरों का गंदा पानी भी सीधे नहर में छोड़ा जा रहा है। सबसे खराब स्थिति गाजीपुर-बलिया राष्ट्रीय राजमार्ग-31 से लेकर बाठा गांव तक देखने को मिल रही है। वीरपुर, बदौली, मिर्जाबाद और धनेठा के पास नहर कई जगह संकरी हो चुकी है। पानी बीच रास्ते में ही रुक जाता है और टेल क्षेत्र तक नहीं पहुंच पाता। इससे किसानों को धान, गेहूं और अन्य फसलों की सिंचाई के लिए निजी संसाधनों पर निर्भर होना पड़ रहा है।ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से समस्या बनी हुई है, लेकिन सिंचाई विभाग और प्रशासन केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते नहर की सफाई और अतिक्रमण हटाने का काम हुआ होता तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती। क्षेत्र के किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।
इस संबंध में लघुडाल विभाग के सहायक अभियंता रवि कुमार यादव ने बताया कि संबंधित विभागों को पत्र भेजा गया है और जांच के बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी, ताकि नहर का पानी सुचारु रूप से किसानों तक पहुंच सके।
