रिपोर्ट अभिषेक राय
भांवरकोल। उत्तर प्रदेश सरकार की प्राथमिकता वाली जनसुनवाई व्यवस्था आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल पर आपूर्ति विभाग की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है। भांवरकोल क्षेत्र में शिकायतों के फर्जी निस्तारण का मामला सामने आने के बाद उपभोक्ताओं और ग्रामीणों में भारी नाराजगी व्याप्त है। आरोप है कि शिकायतों का समाधान किए बिना ही कागजी खानापूर्ति कर शासन को निस्तारण की रिपोर्ट भेजी जा रही है।
मामला भांवरकोल क्षेत्र के लोहारपुर गांव से जुड़ा है, जहां की निवासी सुशीला देवी ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल आईजीआरएस पर शिकायत संख्या 92619500015 दर्ज कराई थी। शिकायत में मनियां मिर्जाबाद स्थित अनुपम भारत गैस एजेंसी पर गैस सिलेंडर न देने और कालाबाजारी करने का गंभीर आरोप लगाया गया था। शिकायतकर्ता ने एजेंसी के खिलाफ जांच और कार्रवाई की मांग की थी।
पीड़िता का आरोप है कि मामले की जांच कर रहे पूर्ति निरीक्षक मुहम्मदाबाद ने बिना किसी ठोस कार्रवाई और सत्यापन के शिकायत का निस्तारण कर दिया। रिपोर्ट में यह दर्शा दिया गया कि आवेदिका को गैस सिलेंडर प्राप्त हो चुका है और शिकायत का समाधान कर दिया गया है। जबकि शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें अब तक न तो नियमित गैस उपलब्ध हो सकी और न ही उनकी समस्या का समाधान हुआ।
इस कथित फर्जी आख्या के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारी केवल शासन को शत-प्रतिशत निस्तारण की रिपोर्ट भेजकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर उपभोक्ता परेशान हैं। लोगों ने आरोप लगाया कि आईजीआरएस जैसे पारदर्शी पोर्टल की विश्वसनीयता पर इस तरह की कार्यशैली से सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने कहा कि यदि शिकायतों का निष्पक्ष निस्तारण नहीं होगा तो आम लोगों का सरकारी व्यवस्था से भरोसा उठ जाएगा। उपभोक्ताओं का यह भी कहना है कि गैस एजेंसियों की मनमानी और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के बजाय विभागीय अधिकारी उन्हें संरक्षण देने में जुटे हैं।
मामले को लेकर क्षेत्रीय लोगों ने जिलाधिकारी अनुपम शुक्ल से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही गैस एजेंसी संचालक और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई किए जाने की मांग भी उठाई है।
