बाराचंवर
गाजीपुर जनपद के मुहम्मदाबाद तहसील क्षेत्र के प्रधान की बरेजी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में अयोध्या से पधारे भागवत वेत्ता मानस मर्मज्ञ श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर श्री शिव राम दास जी फलाहारी बाबा ने अपने मुखारविंद से श्रीमद्भागवत कथा मृत की वर्षा करते हुए कहा की
मनुष्य योनि देवताओं को भी दुर्लभ है परमात्मा के विशेष कृपा से हम सबको प्राप्त हुआ है। उसमें भी सत्संग और दुर्लभ है। जीवन क्षणभंगुर है कल का शुभ कार्य आज कर लेना चाहिए। देव योनि यदि चांदी है तो मनुष्य योनि लोहा है सत्संग रूपी पारस से देव रूपी चांदी स्पर्श करती है तो चांदी ही रह जाती है परंतु मनुष्य योनि रूपी लोहा स्पर्श करता है तो वह सोना बन जाता है। मनुष्य योनि ही मात्र एक योग योनि है बात बाकी सारी योनियां भोग योनि है। मनुष्य की दो स्थितियां होती है फुलवारी में काली से फूल बनकर शो पीस बनाकर मुरझा जाना और माली के हाथ टूट कर यदुनाथ के चरणों में पहुंच जाना। हम सब अनाथ हैं नाथ तो तीन ही है यदुनाथ रघुनाथ और भोलेनाथ। यदि किसी एक का साथ हो जाए तो हम भी सनाथ हो जावें।
