भांवरकोल / गाजीपुर । क्षेत्र के ग्रामसभा तरका (अमरूपुर) स्थित पावन भूमि पर विश्व कल्याणार्थ आयोजित श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के दौरान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की कथा सुन श्रद्धालु भक्ति और उल्लास में डूबे गये। जन्मोत्सव के अवसर पर पूरा कथा परिसर (नंद के आनंद भयो, और ‘जय कन्हैयालाल) के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथा व्यास परम पूज्य देवी प्रतिमा जी ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य बाल लीलाओं का सजीव वर्णन करते हुए धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के महत्व को सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने कहा कि जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है और धर्म का ह्रास होता है, तब स्वयं परमात्मा अवतार लेकर सज्जनों की रक्षा और दुष्टों के विनाश का कार्य करते हैं। कथा में बताया गया कि मथुरा में अत्याचार बढ़ने पर देवताओं एवं पृथ्वी माता की प्रार्थना से भगवान श्रीहरि ने अवतार लिया। अष्टमी की पावन रात्रि में माता देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। जन्म लेते ही कारागृह के बंधन स्वतः टूट गए और वासुदेव जी बालक कृष्ण को लेकर रात्रि में गोकुल नंद बाबा के यहाँ पहुँचे। वहाँ से यशोदा माता की कन्या को लेकर वे पुनः कारागृह लौट आए। कंस द्वारा कन्या को मारने के प्रयास पर वह आकाशवाणी करते हुए अंतर्ध्यान हो गई।गोकुल में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म पर उत्सव का माहौल छा गया, जिसकी झलक कथा स्थल पर भी देखने को मिली। महायज्ञ एवं जन्मोत्सव के आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रही और पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।यज्ञ में प्रमुख रूप सेउमाशंकर राय,प्रधान राजेश राय बंगाली, अखिलेश राय मिंन्टू सहित सभी ग्राम वासी मौजूद रहे
लक्ष्मी नारायण महायज्ञ में भागवत कथा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का भावपूर्ण वणऀन सुन श्रोता हुए निहाल
