गाजीपुर (गहमर): 24 दिसंबर की रात गहमर की धरती विक्की और सौरभ के खून से लाल हुई थी, जिसने पूरे जिले को हिलाकर रख दिया था। परिजनों के ये आरोप कि “हमने पुलिस को पहले ही हत्यारों के हथियारों की फोटो दिखाई थी, लेकिन पुलिस सोती रही”, प्रशासन के लिए गले की हड्डी बन गए थे। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक जब खाकी की थू-थू होने लगी, तो पुलिस ने अपनी जीरो टॉलरेंस वाली छवि को बचाने के लिए जवाबी प्रहार किया है।
मटिया घाट पर हिसाब-किताब, भाग रहा था शूटर, पुलिस ने रोक दी राह
शनिवार की सुबह, जब कोहरे की चादर अभी छंटी भी नहीं थी, गहमर पुलिस को खबर मिली कि हत्याकांड का मुख्य चेहरा ओम सिंह भागने की फिराक में है। मटिया घाट के पास जब पुलिस ने उसे घेरा, तो अपराधी ने फिर वही दुस्साहस दिखाया जिसके लिए वह कुख्यात है। उसने पुलिस टीम पर जान से मारने की नीयत से फायर झोंक दिया लेकिन इस बार खाकी रक्षात्मक नहीं, आक्रामक थी। पुलिस की जवाबी फायरिंग में 19 साल के शूटर ओम सिंह के बाएं पैर में गोली लगी और वह जमीन पर आ गिरा।
वही तमंचा, वही रसूख और अब वही दर्द!
दिलचस्प बात यह है कि जिस .315 बोर के अवैध तमंचे की तस्वीरें मृतक के परिजनों ने पहले ही पुलिस को दी थीं, आज वही तमंचा ओम सिंह के पास से बरामद हुआ। परिजनों का दावा सच साबित हुआ—अपराधी बेखौफ हथियार लहरा रहे थे और पुलिस ने वारदात का इंतजार किया। आज जब वही गोली शूटर के पैर में लगी, तो इलाके के लोगों का कहना है कि “देर से ही सही, पर इंसाफ की शुरुआत हुई है।”
सवाल थोड़ा कड़वा जरूर है लेकिन सच है कि “अगर यही मुस्तैदी 24 दिसंबर से पहले दिखाई गई होती, तो क्या आज विक्की और सौरभ की अर्थी उठती?”
अपराधी का प्रोफाइल, 19 की उम्र और 6 मुकदमे
गिरफ्तार ओम सिंह महज 19 साल का है, लेकिन उसके जुर्म की कुंडली डराने वाली है:
♦ हत्या का तांडव: उस पर गहमर में हुए दोहरे हत्याकांड ♦ धारा 103(1) BNS का मुख्य आरोप है।पुलिस पर ♦ हमला: आज की मुठभेड़ के बाद एक और केस दर्ज।
♦ लंबा इतिहास: महज कुछ महीनों के भीतर उस पर मारपीट, धमकी और जानलेवा हमले के आधा दर्जन मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।
सिस्टम पर सवाल अब भी बरकरार
भले ही पुलिस ने ओम सिंह को अस्पताल पहुँचा दिया हो, लेकिन जनता का आक्रोश पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। गहमर के ग्रामीणों का कहना है कि यह एनकाउंटर पुलिस की साख बचाने की कवायद है। अगर एसपी दफ्तर में दी गई चेतावनी पर पहले कार्रवाई होती, तो आज दो घरों के चिराग न बुझते।
सवाल अब भी बहुत गहरे हैं
“क्या पुलिस ने यह कार्रवाई केवल बढ़ते जन-दबाव और सोशल मीडिया पर हो रही किरकिरी के बाद की है?”
अगला निशाना कौन?
“क्या पुलिस हत्याकांड में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए मुस्तैद रहेगी या मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा?”
क्या तीसरे लड़के की भी हत्या कर दी गई है?
सवाल अब भी वही की तीसरा लड़का कहा गया? स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि इस अपराधी के पकड़ में आने के बाद अब तीसरे लड़के के मिलने की उम्मीद भी बढ़ गई है।
