धर्मेन्द्र भारद्वाज। मऊ
घोसी चीनी मिल बंद होने की अफवाहों को बताया निराधार, कोल्ड स्टोरेज और ऊर्जा उत्पादन में आगे बढ़ने की किसानों से अपील
मऊ, 13 मार्च।
नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा ने शुक्रवार को मऊ जनपद के कुशमौर स्थित राष्ट्रीय बीज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान में आयोजित निस्ट किसान मेला 2026 का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने किसानों से वैज्ञानिक खेती और आधुनिक तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया।
मंत्री शर्मा ने कहा कि ऐसे किसान मेले किसानों को नई तकनीक, उन्नत बीज और आधुनिक कृषि पद्धतियों की जानकारी देने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि देश के किसानों के परिश्रम और समर्पण की बदौलत भारत आज खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बना है और कई कृषि उत्पादों का निर्यात भी कर रहा है।
उन्होंने किसानों से वैज्ञानिकों और कृषि संस्थानों के मार्गदर्शन में आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की अपील की। साथ ही समन्वित खेती (इंटीग्रेटेड फार्मिंग) को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने बताया कि खेती के साथ पशुपालन, बागवानी और मत्स्य पालन को जोड़कर किसान अपनी आय में कई गुना वृद्धि कर सकते हैं।
भंडारण की समस्या का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि किसानों को अक्सर अपने उत्पादों को सुरक्षित रखने में दिक्कत होती है, जिससे उन्हें उचित मूल्य नहीं मिल पाता। सरकार कोल्ड स्टोरेज की स्थापना के लिए सब्सिडी दे रही है और किसानों व उद्यमियों को इन योजनाओं का लाभ उठाना चाहिए।
घोसी चीनी मिल के संबंध में उठ रही चर्चाओं पर उन्होंने कहा कि कुछ लोग राजनीतिक लाभ के लिए भ्रामक बातें फैला रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि घोसी चीनी मिल को बंद करने की किसी में ताकत नहीं है और किसान किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें।
मंत्री शर्मा ने किसानों से कृषि के साथ ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में भी आगे आने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि किसान सोलर पैनल लगाकर बिजली उत्पादन कर सकते हैं और कृषि अपशिष्ट से बायोगैस बनाकर अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने मेले में लगाए गए विभिन्न कृषि स्टालों का अवलोकन किया और उन्नत बीजों, आधुनिक कृषि उपकरणों तथा नई तकनीकों की जानकारी ली।
इस मौके पर प्रगतिशील किसान देवप्रकाश राय और राकेश सिंह ने भी अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में मेले के संयोजक डॉ. ए. आनंदन, केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के कुलपति डॉ. जे. पी. लाल, डॉ. अंजनी सिंह, संबंधित विभागों के अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
