सरकारी अस्पताल या यमलोक, इलाज में देरी और स्टाफ की बदसलूकी ने ली महिला की जान!


गाजीपुर। महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में मानवता को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है, जहां समय पर इलाज न मिलने और स्टाफ की कथित संवेदनहीनता के कारण एक महिला की मौत हो गई। घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें परिजन मदद के लिए गुहार लगा रहे हैं और स्टाफ बेपरवाह नजर आ रहा है।

लापरवाही की इंतहा: तड़पती रही मरीज, मोबाइल में व्यस्त रहा स्टाफ

खडवाडिह निवासी कमलेश कुमार की पत्नी उषा देवी को सांस लेने में तकलीफ के चलते अस्पताल लाया गया था। परिजनों का आरोप है कि वहां तैनात स्टाफ नर्स निधि कुमारी, प्रीतम कुमार और वार्ड बॉय ने इलाज शुरू करने के बजाय उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। वायरल वीडियो के अनुसार, जब मरीज जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही थी, तब स्टाफ कथित तौर पर मोबाइल पर YouTube देख रहा था। लगभग चार घंटे तक बिना किसी प्रभावी उपचार के तड़पने के बाद उषा देवी ने दम तोड़ दिया।

मामला संज्ञान में, होगी उचित कार्रवाई: डॉ. आनंद मिश्रा

इस बेहद गंभीर और विवादित मामले पर जब प्रधानाचार्य प्रोफेसर (डॉ.) आनंद मिश्रा से बात की गई, तो उन्होंने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा-


 “पूरा मामला हमारे संज्ञान में है। अस्पताल प्रशासन इसे अत्यंत गंभीरता से ले रहा है। घटना की गहनता से जांच की जा रही है और जो भी कर्मचारी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”


 

उठते सवाल और आक्रोश

पीड़ित परिवार ने प्राचार्य को शिकायती पत्र सौंपकर न्याय की मांग की है। स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर भारी रोष है। सवाल यह है कि क्या सरकारी अस्पतालों में तैनात कर्मचारी अपनी जवाबदेही भूल चुके हैं? क्या एक गरीब की जान की कीमत सिस्टम के लिए कुछ भी नहीं है?

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