उ.प्र.राजस्व संहिता की धारा 34 (नामांतरण) में वादों की निस्तारण की स्थिति बेहद खराब,जिलाधिकारी ने जताई कड़ी नाराजगी।


धर्मेंद्र भारद्वाज। मऊ

समस्त पीठासीन अधिकारियों से स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के दिए निर्देश,खराब प्रदर्शन वाले तीन पीठासीन अधिकारियों के विरुद्ध आख्या शासन एवं राजस्व बोर्ड को होगी प्रेषित।

 

समय सीमा के उपरांत धारा 34 के तहत जनपद के विभिन्न न्यायालयों में अभी भी 2768 वाद निस्तारण हेतु हैं लंबित।

 

धारा 34 में दायर वादों को अदम पैरवी में खारिज करना नियम विरुद्ध, गुण-दोष के आधार पर ही वादों का करें निस्तारण:- जिलाधिकारी।

 

उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 34 (नामांतरण) में दायर वादों के निस्तारण में जनपद की स्थिति पूरे प्रदेश में बेहद खराब है। जनपद अंतिम पांच में शामिल है, जिसके दृष्टिगत शासन ने समस्त पीठासीन अधिकारियों के विरुद्ध सख्त रवैया अपनाया है। जिलाधिकारी ने कहा कि शासन एवं राजस्व बोर्ड की मंशा के विपरीत जनपद के पीठासीन अधिकारी बेहद लापरवाही बरत रहे हैं,जिसके कारण जनपद की स्थिति प्रदेश स्तर की जारी रैंकिंग में खराब हुई है। उन्होंने समस्त पीठासीन अधिकारियों से इस संबंध में स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। धारा 34 में दायर वादों के निस्तारण हेतु 45 दिनों की समय सीमा निर्धारित है, परंतु बड़ी संख्या में समय सीमा के उपरांत भी जनपद के विभिन्न न्यायालयो में धारा 34 के तहत वादों का निस्तारण अभी भी लंबित है। बड़ी संख्या में निस्तारण हेतु लंबित वादों पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करने हुए जिलाधिकारी ने समस्त पीठासीन अधिकारियों को इनका तत्काल निस्तारण करने के निर्देश दिए हैं। विशेष रूप से 3 वर्ष से ऊपर के समस्त लंबित वादों का तत्काल निस्तारण करने के निर्देश जिलाधिकारी द्वारा दिए गए हैं।इस संबंध में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा भी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा गया है कि निर्धारित समय सीमा 45 दिन के अंदर धारा 34 के वादों का निस्तारण न होने पर स्पष्ट एवं सही कारणों का उल्लेख करना आवश्यक है।अन्यथा की स्थिति में संबंधित पीठासीन अधिकारी जिम्मेदार होंगे तथा उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वादों के निस्तारण की समीक्षा के दौरान कुछ पीठासीन अधिकारियों द्वारा धारा 34 में दायर वादों को अदम पैरवी में खारिज करने की प्रवृत्ति देखने को मिल रही है, जिसे शासन एवं राजस्व बोर्ड द्वारा प्रतिकूल रूप में लिया जा रहा है। जिलाधिकारी ने समस्त पीठासीन अधिकारियों को धारा 34 में दायर वादों का निस्तारण गुण दोष के आधार पर ही करने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि अब पीठासीन अधिकारियों को लिखित में देना होगा कि धारा 34 में दायर वादो को 45 दिन के अंदर क्यों निस्तारित नहीं किया जा सका। जनपद के समस्त न्यायालयों में 45 दिन से 1 साल के बीच कुल 2343 वाद,1 वर्ष से 3 वर्ष के बीच कुल 372 वाद,3 वर्ष से 5 वर्ष के बीच 50 वाद तथा 5 वर्ष से भी अधिक समय के कुल 3 वाद धारा 34 के तहत अभी भी निस्तारण हेतु लंबित हैं। निर्धारित समय सीमा के इतने सालों के उपरांत भी वादों का निस्तारण न होना पीठासीन अधिकारियों के गंभीर लापरवाही का ही नतीजा है। जिसके दृष्टिगत जिलाधिकारी ने समस्त संबंधित पीठासीन अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने चेतावनी के साथ कहा है कि अगर यथाशीघ्र पीठासीन अधिकारी अपनी कार्य शैली में सुधार नहीं लाते हैं तो सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले तीन पीठासीन अधिकारियों के विरुद्ध आख्या राजस्व बोर्ड एवं शासन को भेजी जाएगी। इसके अलावा उन्होंने बिना ठोस आधार के आपत्तियां लेने अथवा अनावश्यक बार-बार आपत्ति हेतु अवसर प्रदान करने वाले तीन पीठासीन अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।

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