भारतीय संस्कृति में दांपत्य सम्मान, प्रेम और विश्वास की जीवंत परंपरा – बरिष्ठ अधिवक्ता राम अशीष राय


भांवरकोल /गाजीपुर: भारतीय संस्कृति में पति-पत्नी का संबंध केवल सामाजिक व्यवस्था नहीं, बल्कि प्रेम, सम्मान और आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित एक पवित्र बंधन है। यह विचार 76 वर्षीय बुजुर्ग वरिष्ठ अधिवक्ता रामअशीष राय ने व्यक्त करते हुए कहा कि पत्नी द्वारा पति के पैर छूकर आशीर्वाद लेना किसी प्रकार का समर्पण नहीं, बल्कि दांपत्य रिश्ते की गहराई और आपसी विश्वास का प्रतीक है।

अधिवक्ता राय के अनुसार, यह परंपरा प्रेम और श्रद्धा से जुड़ी हुई है, जहाँ अहंकार का त्याग कर ‘मैं’ से ‘हम’ की भावना स्थापित होती है। उन्होंने कहा कि जब सम्मान स्वेच्छा और स्नेह से प्रकट होता है, तब वह रिश्ते को और अधिक मजबूत बनाता है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय संस्कृति में पारस्परिक सम्मान को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। पत्नी का श्रद्धा भाव जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही आवश्यक है कि पति भी अपनी पत्नी के प्रति स्नेह, आदर और उसकी गरिमा का पूर्ण ध्यान रखे। सम्मान यदि दोनों ओर से हो, तभी दांपत्य जीवन सुखमय और संतुलित बनता है। उन्होंने आध्यात्मिक दृष्टि से बताते हुए कहा कि एक-दूसरे का आदर करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो परिवार की सुख-शांति और स्थिरता की नींव बनता है।

उनके अनुसार, भारतीय संस्कृति की सुंदरता इसी में निहित है कि यहाँ परंपराएँ किसी पर प्रभुत्व स्थापित करने के लिए नहीं, बल्कि रिश्तों में प्रेम, मर्यादा और स्नेह का संतुलन बनाए रखने के लिए हैं। निश्चित रूप से, श्री राय के ये विचार आज के समाज को यह संदेश देते हैं कि जहाँ प्रेम और सम्मान साथ चलते हैं, वहीं दांपत्य जीवन प्रेरणादायक और सुदृढ़ बनता है।

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