– विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण पर – – – किसानों का फूटा गुस्सा, 600 बीघे से अधिक जमीन प्रभावित
सर्किल रेट पर उठाए सवाल, बोले- कम मुआवजा मिला तो जमीन जाएगी और परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा होगा
सेवराई। विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे की जद में आ रही किसानों की खेती की जमीन के मुआवजे को लेकर सेवराई तहसील क्षेत्र में असंतोष गहराता जा रहा है। 600 बीघे से अधिक कृषि भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया के बीच गुरुवार को सेवराई , गहमर, मनियां, बारा, गोड़सरा , बकसड़ा, मिश्रवलिया , आदि विभिन्न प्रभावित गांवों के किसान एकजुट होकर तहसील मुख्यालय पहुंचे और उपजिलाधिकारी गजराज सिंह यादव को ज्ञापन सौंपकर बाजार भाव के अनुरूप मुआवजा तय करने की मांग की। किसानों ने आरोप लगाया कि यदि मौजूदा दरों पर जमीन का अधिग्रहण हुआ तो उन्हें अपनी जमीन का वास्तविक मूल्य नहीं मिल पाएगा और कई किसान जमीन जाने के बाद आर्थिक रूप से कमजोर हो जाएंगे।
किसानों का सबसे बड़ा सवाल सर्किल रेट और वास्तविक बाजार भाव के बीच भारी अंतर को लेकर है। किसानों के मुताबिक क्षेत्र में खेती की जमीन का बाजार मूल्य करीब 30 लाख रुपये प्रति बीघा तक है, जबकि अलग-अलग गांवों में प्रस्तावित मुआवजा करीब 12 से 17 लाख रुपये प्रति बीघा बताया जा रहा है। किसानों का कहना है कि जिस जमीन को बाजार में करीब 30 लाख रुपये प्रति बीघा का मूल्य मिल रहा है, उसके लिए इससे काफी कम मुआवजा तय करना उनके साथ न्याय नहीं होगा।
एक जैसी जमीन, अलग-अलग मुआवजा क्यों?
किसानों ने मुआवजा दरों में कथित असमानता पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि उचितपुर और अकबरपुर में करीब 17 लाख रुपये प्रति बीघा, जबकि दूसरे इलाकों में 12 से 13 लाख रुपये प्रति बीघा की दर बताई जा रही है। वहीं गहमर खास में करीब 17 लाख रुपये प्रति बीघा की दर निर्धारित किए जाने की बात कही गई है। किसानों ने सवाल उठाया कि यदि जमीन की प्रकृति और उपयोग समान है तो मुआवजे की दरों में इतना अंतर क्यों रखा जा रहा है।
किसानों का कहना है कि खेती की जमीन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि उनके परिवारों की आजीविका का आधार है। जमीन चली जाने के बाद मिलने वाले मुआवजे से उसी क्षेत्र में दूसरी कृषि भूमि खरीदना भी मुश्किल होगा। ऐसे में कम मुआवजा मिलने पर भविष्य में परिवारों के सामने आर्थिक संकट पैदा हो सकता है।
चार मांगों पर अड़े किसान
ज्ञापन में किसानों ने प्रभावित जमीन का मौके पर जाकर पारदर्शी सर्वे कराने, समान प्रकृति की जमीन के लिए एक समान और वास्तविक दर निर्धारित करने, सरकार की चार गुना मुआवजा नीति के अनुरूप किसानों को उनका हक देने तथा किसान प्रतिनिधिमंडल को जिलाधिकारी से मुलाकात का समय देने की मांग की है।
किसानों ने स्पष्ट कहा कि वे विकास परियोजना के विरोध में नहीं हैं, लेकिन विकास की कीमत किसानों के हितों की अनदेखी करके नहीं चुकाई जानी चाहिए। उनका कहना है कि जमीन का अधिग्रहण होने से पहले बाजार मूल्य और किसानों के हितों का निष्पक्ष आकलन जरूरी है।
प्रशासन ने मांगी बाजार भाव की सूची
मामले में एसडीएम गजराज सिंह यादव ने बताया कि किसानों से बाजार रेट से संबंधित सूची मांगी गई है। सूची का निरीक्षण करने के बाद वास्तविक स्थिति से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। इसके बाद नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
किसानों के तेवर और ज्ञापन के बाद अब निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक्सप्रेसवे के लिए जमीन देने वाले किसानों को उनकी जमीन का वास्तविक बाजार मूल्य मिलेगा या सर्किल रेट के आधार पर ही मुआवजा तय होगा।
