या हुसैन… या हुसैन’ की सदाओं के बीच नम आंखों से दफन हुए ताजिये: विभिन्न अखाड़ों ने दिखाए हैरतअंगेज करतब, प्रशासन की सतर्कता से शांतिपूर्वक सम्पन्न हुआ पर्व


बहादुरगंज/गाजीपुर। मुहर्रम की दसवीं तारीख (यौमे आशूरा) पर कस्बे सहित आसपास के क्षेत्रों में गम और अकीदत के साथ ताजियों का जुलूस निकाला गया। “या हुसैन… या हुसैन” की गूंज और मातमी माहौल के बीच अकीदतमंदों ने इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की। देर रात सभी ताजियों को निर्धारित कर्बला में धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार नम आंखों से सुपुर्द-ए-खाक किया गया। वहीं सुबह से ही विभिन्न मोहल्लों से ताजियों के जुलूस निकलने शुरू हो गए। पारंपरिक साज-सज्जा से सजे ताजियों के साथ बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। मातमी धुनों और नौहा ख्वानी के बीच अकीदतमंद सीना-ज़नी करते हुए आगे बढ़ते रहे। पूरा वातावरण गम और श्रद्धा से सराबोर रहा।  वहीं पर नगर के क़ासिमियाँ अखाड़ा तथा इस्लामियां अखाड़ा का जुलूस अपने पारंपरिक रूप से उठाया गया जहां पर युवाओं ने अपने पारंपरिक कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। जिसमें लाठी, बनैठी, फीता और अन्य पारंपरिक युद्ध कलाओं के हैरतअंगेज करतबों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। जगह-जगह लोगों की भीड़ इन प्रदर्शनों को देखने के लिए उमड़ पड़ी और खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। जबकि मिलौनी में अखाड़े के लोगों ने लकड़ी, भाना, तथा विभिन्न प्रकार के कौशलों का प्रदर्शन किया जबकि ताशा बजाने को लेकर पुरानीगंज और रसूलपुर के बीच पारंपरिक रूप जोरदार मुकाबला देखने को मिला जहां पर नदी के दोनों छोरों पर काफी भीड़ देखने को मिली। जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया।  वहीं पर नगर के विभिन्न ताजियेदारों ने अपने अपने चौक से ताजिए को उठाकर या अली या हुसैन की सदाओं के साथ मातम करते हुए अपने अपने स्थानों से आगे बढ़ते हुए कर्बला पहुंचने के बाद धार्मिक परंपराओं के अनुसार ताजियों को दफन किया गया। इस दौरान उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गईं और हर ओर “या हुसैन” की सदाएं गूंजती रहीं। लोगों ने कर्बला के शहीदों की कुर्बानी को याद करते हुए अमन, भाईचारे और इंसानियत के संदेश को अपनाने का संकल्प लिया। मुहर्रम के अवसर पर सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे। प्रशासन और पुलिस के अधिकारी पूरे दिन विभिन्न जुलूस मार्गों और संवेदनशील स्थानों पर मुस्तैद रहे। पुलिस बल के साथ पीएसी तथा अन्य सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई थी। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से भी गतिविधियों पर नजर रखी गई। अधिकारियों ने लगातार भ्रमण कर व्यवस्था का जायजा लिया और जुलूसों को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया। वहीं पर नगर के गणमान्य नागरिकों, ताजियादारों, अखाड़ा समितियों और स्वयंसेवकों ने भी प्रशासन का सहयोग करते हुए अनुशासन बनाए रखा। सभी जुलूस निर्धारित मार्गों से होकर समयबद्ध तरीके से कर्बला पहुंचे, जिससे कहीं भी किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई। प्रशासन ने शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखने के लिए क्षेत्र की जनता, ताजियादारों, अखाड़ा समितियों तथा सभी धर्मों के नागरिकों का आभार व्यक्त किया। आपसी सहयोग और भाईचारे के चलते मुहर्रम का पर्व पूरी श्रद्धा, अनुशासन और शांति के साथ सम्पन्न हुआ।

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