भांवरकोल। क्षेत्र के सेमरा, बसनिया, मसोन, खरडीहा, गड़ऊर और कुंडेसर सहित करीब आधा दर्जन पशु सेवा केंद्र वर्षों से बंद पड़े हैं। कहीं एक दशक तो कहीं दो दशक से इन केंद्रों पर ताले लटके हैं, जिससे पशुपालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
भीषण गर्मी में पशुओं के बीमार पड़ने पर मजबूरी में पशुपालकों को झोलाछाप डॉक्टरों का सहारा लेना पड़ता है। कई बार समय पर इलाज न मिलने से पशुओं की मौत तक हो जाती है। कई केंद्रों की इमारतें जर्जर हो चुकी हैं, कहीं ताले टूटे पड़े हैं तो कहीं भवन ढहने की स्थिति में हैं।
पशुधन विभाग के अधिकारियों के सेवानिवृत्त होने के बाद भी इन केंद्रों पर नई नियुक्ति नहीं हो सकी है। क्षेत्र में पशुपालकों की संख्या अधिक होने के बावजूद पशु चिकित्सा सुविधा बंद रहने से ग्रामीणों में नाराजगी है। इस संबंध में जब जिला पशु चिकित्सा अधिकारी गाजीपुर से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका मोबाइल स्विच ऑफ मिला।
