मनियां में श्रीमद्भभागवत कथा के छठे दिन कथा में भाव विभोर हुए श्रद्धालु


भावरकोल: क्षेत्र के मनिया गाव में चल रहे सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद भागवत कथा के छ्ठवे दिन वृंदावन से पधारे कथावाचक

श्रीधाम वृंदावन आचार्य पंडित विजय नाथ त्रिपाठी जी महराज ने  गुरुवार को देर रात तक चले कथा में भौमासुर वध, स्मयन्तक मणि चोरी, सुदामा चरित्र का मनमोहक वर्णन किया।

आचार्य पंडित विजय नाथ त्रिपाठी जी महराज ने कहा कि भगवान द्वारिकाधीश के 16108 विवाह हुए तथा प्रद्युग्नदि पुत्र हुए। प्रत्येक रानी से दस पुत्र और एक कन्या हुई तथा भौमासुर आदि का वध किया। भगवान ने सुदामा जी की सेवा करके एक मित्रता की मिसाल दी ।

आगे कहा कि सुदामा जी जितेंद्रिय थे एवं भगवान कृष्ण के परम मित्र थे। भिक्षा मांगकर अपने परिवार का पालन पोषण करते । गरीबी के बावजूद भी हमेशा भगवान के ध्यान में मग्न रहते। पत्नी सुशीला सुदामा जी से बार बार आग्रह करती कि आपके मित्र तो द्वारकाधीश हैं उनसे जाकर मिलो शायद वह हमारी मदद कर दें। सुदामा पत्नी के कहने पर द्वारका पहुंचते हैं और जब द्वारपाल भगवान कृष्ण को बताते हैं कि सुदामा नाम का ब्राम्हण आया है। कृष्ण यह सुनकर नंगे पैर दौङकर आते हैं और अपने मित्र को गले से लगा लेते । उनकी दीन दशा देखकर कृष्ण के आंखों से अश्रुओं की धारा प्रवाहित होने लगती है। सिंहासन पर बैठाकर कृष्ण जी सुदामा के चरण धोते हैं। सभी पटरानियां सुदामा जी से आशीर्वाद लेती हैं। सुदामा जी विदा लेकर अपने स्थान लौटते हैं तो भगवान कृष्ण की कृपा से अपने यहां महल बना पाते हैं लेकिन सुदामा जी अपनी फूंस की बनी कुटिया में रहकर भगवान का सुमिरन करते हैं। कथा का मार्मिक वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।अंत में आरती व प्रसाद वितरण हुआ।

 

इस मौके पर मुख्य यजमान भावनाथ पांडेय, धनमुखी पांडेय, अजय पाण्डेय,शिवम् पाण्डेय ,

,जयशंकर प्रसाद ,चन्दन ठाकुर ,साधु सिंह ,रामसूरत, उपाध्याय ,उमा पाण्डेय ,इन्द्रा पाण्डेय,अभिमन्यु गुप्ता , ऋषभ ,संजय,आदर्श पाण्डेय ,नेहा तिवारी ,सुधासंजय प्रजापति यादव सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।

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