सम्पूर्ण समाधान दिवस, सख्ती संदेश और सिस्टम को आइना


सम्पूर्ण समाधान दिवस में देरी-अनुपस्थिति पर डीएम सख्त, 18 अधिकारियों को नोटिस, जनता बोली—अब कुर्सियाँ समय सीखें, जवाबदेही जागे

लोक अधिकार

*तमकुही राज कुशीनगर। शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता वाले कार्यक्रम सम्पूर्ण समाधान दिवस में इस बार प्रशासन का तेवर अलग ही दिखा। तहसील तमकुहीराज के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में जिलाधिकारी महेन्द्र सिंह तंवर की अध्यक्षता में व्यवस्था, जवाबदेही और समयपालन पर ऐसा जोर रहा कि संदेश दूर तक गया—“लापरवाही अब ‘रूटीन’ नहीं, ‘रिस्क’ है।”*

कार्यक्रम की शुरुआत से पहले ही अनुशासन की दस्तक सुनाई दे गई। जिला समाज कल्याण अधिकारी रमाशंकर यादव के विलम्ब से पहुंचने पर कारण बताओ नोटिस जारी हुआ। निर्धारित समय प्रातः 10:00 बजे के बजाय 11:25 बजे उपस्थिति को जिलाधिकारी ने शासनादेश की अवहेलना मानते हुए तीन दिवस में स्पष्ट स्पष्टीकरण तलब किया। नोटिस में साफ शब्दों में चेतावनी—संतोषजनक उत्तर न मिलने पर वार्षिक प्रतिकूल प्रविष्टि और विभागीय कार्यवाही का प्रस्ताव। प्रशासनिक गलियारों में इसे “सख्ती का संकेत” माना जा रहा है।

इतना ही नहीं, समाधान दिवस में अनुपस्थित रहने पर 17 अधिकारियों को भी कारण बताओ नोटिस थमाया गया। सूची लंबी रही—प्रभागीय वनाधिकारी से लेकर अधिशासी अभियन्ता (लोक निर्माण), जल निगम, सिंचाई, बाढ़ खण्ड, जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी, जिला सूचना अधिकारी, अग्रणी जिला प्रबंधक (बैंकिंग) और खण्ड विकास अधिकारी फाजिलनगर तक। जिलाधिकारी का स्पष्ट संदेश—“जनसमस्याओं के मंच से दूरी, जवाबदेही से दूरी नहीं हो सकती।”

सभागार के भीतर तस्वीर अलग थी। जिलाधिकारी महेन्द्र सिंह तंवर और पुलिस अधीक्षक केशव कुमार ने आमजन की शिकायतें गंभीरता से सुनीं। कुल 56 प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए—राजस्व के 28, पुलिस के 11, विकास के 5 और अन्य विभागों के 10। राजस्व विभाग के 6 मामलों का मौके पर निस्तारण कर राहत दी गई, शेष प्रकरणों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान के निर्देशों के साथ संबंधित विभागों को भेजा गया।

जिलाधिकारी ने भूमि विवाद, वरासत, पैमाइश और सीमांकन जैसे संवेदनशील मामलों को प्राथमिकता देने को कहा। वहीं पुलिस अधीक्षक ने थाना प्रभारियों को निर्देशित किया कि कानून-व्यवस्था और आपसी रंजिश के मामलों में त्वरित, निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित हो, ताकि शिकायतकर्ता “कार्यालयों के चक्कर” की पुरानी परंपरा से मुक्त हों।

कार्यक्रम के उपरांत तहसील निरीक्षण में न्यायालय की पत्रावलियों का अवलोकन कर लंबित मामलों पर शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए गए। उपजिलाधिकारी आकांक्षा मिश्रा, सीएमओ डॉ. चंद्र प्रकाश बर्मा, तहसीलदार महेश कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

समाधान दिवस ने इस बार दो तस्वीरें साथ रखीं—एक ओर सख्ती की धार, दूसरी ओर समाधान की पुकार। कटाक्ष यह कि जिन कुर्सियों को जनता की आवाज़ सुननी थी, उनमें कुछ खाली रहीं; पर संकेत साफ है—अब खाली कुर्सियाँ भी सवालों के घेरे में होंगी। प्रशासन ने बता दिया है कि समयपालन और संवेदनशीलता केवल शब्द नहीं, सेवा का अनिवार्य शर्त हैं।

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