धर्मेन्द्र भारद्वाज | मऊ
भरोसा और सहयोग से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था, विकास विरोधी राजनीति से सतर्क रहने की अपील
मऊ, 25 मार्च 2026।
मऊ जनपद में आयोजित जिला सहकारी बैंक के चतुर्थ वार्षिक अधिवेशन में नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने सहकारिता को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए बड़े विकास संकेत दिए। उन्होंने साफ कहा कि भरोसा, पारदर्शिता और सहयोग के दम पर सहकारिता आंदोलन को नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सकता है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में सहकारिता क्षेत्र में आए बदलावों का उल्लेख किया। उन्होंने आनंद की अमूल मॉडल का जिक्र करते हुए कहा कि इसी तर्ज पर पूर्वांचल में भी बनास डेयरी स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है, जिससे किसानों और पशुपालकों की आय में सीधा इजाफा होगा।
घोसी चीनी मिल पर बड़ा भरोसा
मंत्री शर्मा ने घोसी चीनी मिल को लेकर चल रही चर्चाओं पर विराम लगाते हुए स्पष्ट कहा, “घोसी चीनी मिल का कोई बाल बांका भी नहीं कर सकता।” उन्होंने बताया कि इस मिल के आधुनिकीकरण के लिए योगी आदित्यनाथ से फंड की मांग की गई है, जिसे स्वीकृति मिल चुकी है। जल्द ही मिल को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा।
“विकास रोकने वालों से सावधान रहें”
अपने भाषण में मंत्री ने राजनीतिक संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग “शांत पानी में पत्थर मारकर लहर गिनने” की राजनीति करते हैं। ऐसे लोगों से सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे नकारात्मक राजनीति से दूर रहकर विकास की मुख्यधारा का हिस्सा बनें।
मऊ में विकास की रफ्तार तेज
मंत्री ने कहा कि मऊ अब तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है और इसे कोई रोक नहीं सकता। उन्होंने यह भी बताया कि टी-सीरीज द्वारा मऊ महादेव पर शूटिंग का प्रस्ताव क्षेत्र के लिए गर्व की बात है, जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
सहकारी बैंक ने बदली तस्वीर
कार्यक्रम में जिला सहकारी बैंक के जिलाध्यक्ष अखिलेश त्रिपाठी ने बताया कि मऊ का सहकारी बैंक, जो पहले घाटे में था, अब मुनाफे में आ गया है। इस वित्तीय वर्ष में करीब 50 लाख रुपये लाभ की संभावना है। जिले में 75 हजार से अधिक सदस्य सहकारिता से जुड़े हैं और हर स्तर पर समितियां सक्रिय हैं।
निष्कर्ष
मऊ में सहकारिता के जरिए आर्थिक मजबूती का जो खाका पेश किया गया है, उसमें डेयरी, चीनी मिल और बैंकिंग सुधार जैसे कई आयाम शामिल हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि ये घोषणाएं जमीन पर कितनी तेजी से उतरती हैं और किसानों-पशुपालकों को इसका कितना लाभ मिलता है।
