गाजीपुर। गाजीपुर शहर और आसपास के इलाकों में सड़कों की दयनीय स्थिति ने स्थानीय निवासियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं जिले में समाजवादी पार्टी के पाँच विधायक और एक सांसद, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के दो विधायक, और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के MLC, जिला पंचायत अध्यक्ष, और राज्यसभा सांसद जैसे तमाम बड़े जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी के बावजूद, शहर की मुख्य सड़कों से लेकर अंदरूनी गलियों तक का हाल बुरा है।
जनप्रतिनिधि बनाम बदहाली “सड़कों की खस्ता हालत ने न सिर्फ आम जनजीवन को प्रभावित किया है, बल्कि यह जनप्रतिनिधियों के आपसी समन्वय और कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़कों की मरम्मत और रखरखाव के लिए जिम्मेदार नगरपालिका और लोक निर्माण विभाग जैसी संस्थाएँ निष्क्रिय बनी हुई हैं। जनप्रतिनिधियों की इस लंबी सूची के बावजूद, सड़कों की मरम्मत न होने के पीछे फंड की कमी, सरकारी विभागों के बीच समन्वय की कमी, या राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव मुख्य कारण हो सकते हैं। एक ओर जब विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता जनता से वोट मांगने आते हैं, तो बुनियादी ढाँचे के विकास के बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद सड़कों की बदहाली जस की तस बनी रहती है।”
हस्ताक्षर अभियान से फूटा गुस्सा “खराब सड़कों के विरोध में, गाजीपुर नगरपालिका क्षेत्र के समाजसेवी विवेक कुमार सिंह शम्मी ने सड़कों की मरम्मत की मांग को लेकर एक हस्ताक्षर अभियान शुरू किया था जिसका आज सातवां दिन है। इस अभियान में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हो रहे हैं, जो सीधे तौर पर जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को अपनी समस्याओं से अवगत करा रहे हैं।यह अभियान सीधे तौर पर सत्ता में बैठे नेताओं और प्रशासन से पूछ रहा है कि आखिर इतने बड़े और प्रभावशाली राजनीतिक प्रतिनिधित्व के बावजूद, सड़कों की बदहाली का वास्तविक जिम्मेदार कौन है?”
स्थानीय निवासियों ने अपील की है कि सभी दलों के जनप्रतिनिधि राजनीति से ऊपर उठकर इस बुनियादी समस्या पर ध्यान दें, ताकि लोगों को दुर्घटनाओं, जाम और धूल-मिट्टी से राहत मिल सके।
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आगे क्या? क्या प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस हस्ताक्षर अभियान पर ध्यान देंगे? क्या जल्द ही गाजीपुर की सड़कों की सूरत बदलेगी?
