जी०एल०एफ० 2025 से गाजीपुर को मिली अंतर्राष्ट्रीय साहित्यिक पहचान,सीएमडी उपेंद्र राय बोले ‘ किताबें हैं आत्मा का आईना
गाज़ीपुर:भारत एक्सप्रेस के सीएमडी और एडिटर इन चीफ उपेंद्र राय की ऐतिहासिक पहल पर आयोजित तीन दिवसीय ‘गाज़ीपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2025 ने गाजीपुर जिले के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। पूर्वांचल के सबसे बड़े साहित्य, संस्कृति और कला समारोह के रूप में आयोजित यह फेस्टिवल, अब गाजीपुर को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय साहित्यिक मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान दिलाने का माध्यम बन चुका है।इस भव्य आयोजन ने यह साबित कर दिया कि गाजीपुर केवल अपनी कृषि, सेनानियों या भौगोलिक स्थिति के लिए ही नहीं, बल्कि साहित्य, विचार और संस्कृति के केंद्र के रूप में भी जाना जाता है।
इस आयोजन में कई प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया जैसे जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा,भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला,अभिनेता अंजन श्रीवास्तव ,एनजीओ ‘गूँज’ के संस्थापक अंशु गुप्ता,दक्षिण अफ्रीका के उच्चायुक्त अनिल सुखलाल, गुयाना के उच्चायुक्त केशव तिवारी, पोलिश विद्वान कामीला ज्यूनिक, और डच राजनयिक रमन भगवानदीन,बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अजीत चतुर्वेदी, पद्म श्री से सम्मानित संगीत विद्वान डॉ. राजेश्वर आचार्य,सी-वोटर के संस्थापक यशवंत देशमुख,वरिष्ठ साहित्यकार नीरजा माधव, कवि व्योमेश शुक्ल, लेखक मृत्युंजय सिंह, और भोजपुरी साहित्य के आइकॉन मनोज भावुक।
अंतर्राष्ट्रीय विद्वानों की भूमिका रही महत्वपूर्ण-दक्षिण अफ्रीका के हाई कमिश्नर प्रोफेसर अनिल सुखलाल और अन्य विदेशी विद्वानों की सहभागिता ने गाजीपुर को एक वैश्विक मंच प्रदान किया।
सीएमडी उपेंद्र राय “जड़ों की ओर” थीम के माध्यम से, जिले के महान व्यक्तिव वाले व्यक्ति स्वामी सहजानंद सरस्वती, कुबेरनाथ राय, और डॉ. विवेकी राय जैसे अपने महान विचारकों और साहित्यकारों की विरासत पर गर्व महसूस करने का विचार प्रकट किए।
ग़ाज़ीपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2025 ने यह साबित कर दिया कि समाज को जोड़ने और प्रेरित करने के लिए साहित्य आज भी सबसे शक्तिशाली माध्यम है। यह तीन दिवसीय आयोजन 7 नवंबर को वाराणसी में शुरू हुआ तथा 8 एवं 9 नवंबर को गाजीपुर में मुख्य कार्यक्रम के साथ संपन्न हुआ।पहला दिन उद्घाटन समारोह, अंतर्राष्ट्रीय विशिष्ट अतिथियों का आगमन गाजीपुर को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर लाने की महत्वपूर्ण नींव रखी गई।दूसरा दिन 8 नवम्बर को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का संबोधन, ‘जड़ों की ओर’ पर जोर दिया गया तथा गाजीपुर के इतिहास और वीरों की गाथाओं का अंतराष्ट्रीय स्तर पर स्मरण हुआ।तीसरे दिन 9 नवंबर की भूमिक महत्वपूर्ण थी जिसमें ‘गिरमिटिया समाज’ पर विशेष सत्र, कवि सम्मेलन,भोजपुरी संस्कृति और गाजीपुर के वैश्विक प्रभाव को दर्शाया गया।
उपेंद्र राय ने अपने प्रमुख विचार और प्रेरणा को संबोधित करते हुए यह कहा कि- उन्हें “महात्मा गांधी से प्रेरणा मिलती है” क्योंकि आजादी की लड़ाई में उनका बहुत बड़ा योगदान था।उन्होंने मुख्य धारा के मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि “मेन स्ट्रीम मीडिया अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाता है” लेकिन “सोशल मीडिया आपको आज़ादी देता है” और एक “ओपन प्लेटफॉर्म देता है।”उन्होंने जोर दिया कि प्रगति और संतुलन के लिए “राइट और लेफ्ट विंग दोनों जरूरी” है।
संबंधों पर विशेष रूप से विचार करते हुए उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में तलाक रेट सबसे कम है लेकिन समस्याएँ सबसे ज्यादा हैं। उनके अनुसार, “शादी नामक संस्था प्रेम की हत्या की गारंटी हो गई है,” क्योंकि उन्होंने रिश्तों में प्रेम की जगह समझौता अधिक देखा है।
साहित्य के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि “साहित्य हमारे जीवन को सुंदर बनाता है” और उन्हें खुद “किताबों के योगदान” से बहुत ताकत मिली है।
सीएमडी उपेंद्र राय का प्रेरक संदेश- सीएमडी उपेंद्र राय ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा, “गाजीपुर वह धरती है जहाँ गंगा अपनी धारा बदलती हैं, और यह हमें सदियों से मार्गदर्शन देता रहा है।” उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि किताबें ‘आत्मा का आईना’ होती हैं और साहित्य ही हमें खुद से जोड़ता है। इस फेस्टिवल का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक विचार क्रांति की शुरुआत करना था।
‘गाज़ीपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2025’ ने इस जिले को एक स्थानीय स्थान से उठाकर विचारों और साहित्य के केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया है। यह सफल आयोजन जिले के लिए एक नई पहचान और गर्व का विषय बन गया है।
