बिजली विभाग में गजब का खेल! संविदा SSO ने नौकरी के साथ की ठेकेदारी, अधिकारियों की जांच में हुआ बड़ा खुलासा


जमानियां/गाज़ीपुर: बिजली विभाग के एक संविदाकर्मी द्वारा नियमों को ताक पर रखकर दोहरा फायदा लेने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है विभाग की आंतरिक जांच में खुलासा हुआ है कि एक संविदा सब-स्टेशन ऑपरेटर (SSO) जिस विद्युत वितरण खंड में अपनी ड्यूटी कर रहा था, उसी क्षेत्र में वह ठेकेदारी का काम भी कर रहा था।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, बिजली विभाग में संविदा पर तैनात SSO विद्युत वितरण खंड जमानिया में तैनात था तथा अपनी पोस्टिंग वाले विद्युत वितरण खंड में बिजली आपूर्ति और उपकेंद्र के संचालन का कार्य देख रहा था। इसी दौरान, वरिष्ठ अधिकारियों को गोपनीय शिकायतें मिली थीं कि यह संविदाकर्मी अपने पद का दुरुपयोग कर रहा है और उसी वितरण खंड में ठेकेदार के रूप में भी सक्रिय है।

सूत्रों के मुताबिक, संविदाकर्मी ने विभाग से संबंधित छोटे-मोटे मरम्मत कार्य, सप्लाई से जुड़े ठेके हासिल किए थे। विभाग का संविदाकर्मी होने के नाते, उसे क्षेत्र की बिजली व्यवस्था, ज़रूरतों और अंदरूनी प्रक्रियाओं की पूरी जानकारी थी, जिसका लाभ उठाकर उसने नियमों का उल्लंघन किया।

जांच में हुआ बड़ा खुलासा

शिकायत मिलने के बाद, बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम ने इस मामले की गोपनीय जांच शुरू की। जांच के दौरान, SSO द्वारा उसी वितरण खंड में ठेकेदारी करने के पुख्ता सबूत मिले। यह स्पष्ट रूप से सरकारी सेवा नियमों का उल्लंघन है, जहाँ कोई भी कर्मचारी, खासकर संविदा पर तैनात व्यक्ति, अपने आधिकारिक कार्यक्षेत्र में ठेकेदारी या व्यापारिक गतिविधि में शामिल नहीं हो सकता, जिससे उसके आधिकारिक कर्तव्यों पर सीधा असर पड़ता हो। सूत्रों द्वारा अंदर से यह खबर प्राप्त हुई की एक संविदाकर्मी होने के नाते, उसे अपने कार्यक्षेत्र में किसी भी व्यावसायिक गतिविधि में शामिल नहीं होना चाहिए। यह न केवल नियम का उल्लंघन है, बल्कि यह भ्रष्ट आचरण को भी बढ़ावा देता है, क्योंकि वह ठेकेदारी और विभागीय काम में अपनी स्थिति का लाभ उठा सकता था।

आगे की कार्यवाही

मामले की जानकारी होते ही इस डर से कि संविदा कर्मी के खिलाफ कोई कार्यवाही न हो जाए उसने तत्काल ही अपना इस्तीफा विभाग को सौंप दिया। इस्तीफा प्राप्त होने के बाद ही विभाग ने SSO को ड्यूटी से हटाने का आदेश जारी कर दिया है।

अब तक विभाग द्वारा इस बात की कोई जांच नहीं की गई कि इस अवैध गतिविधि में उपकेंद्र या वितरण खंड के किसी अन्य कर्मचारी या अधिकारी की मिलीभगत तो नहीं थी।

इस मामले ने बिजली विभाग की संविदा भर्ती और उनके कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रश्न यह है कि जांच में खुलासा होने के बाद ही संविदा कर्मी द्वारा त्यागपत्र क्यों दिया गया तथा बिना किसी कार्रवाई के ही विभाग द्वारा त्यागपत्र को किस आधार पर स्वीकार किया गया?

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