सेवराई तहसील में भ्रष्टाचार के आरोप पर अधिवक्ताओं का हंगामा, न्यायिक कार्य का बहिष्कार


सेवराई। स्थानीय तहसील में कथित भ्रष्टाचार के विरोध में मंगलवार को अधिवक्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। बार एसोसिएशन के बैनर तले अधिवक्ताओं ने प्रस्ताव पारित कर नारेबाजी करते हुए उपजिलाधिकारी (एसडीएम) कार्यालय तक मार्च निकाला और न्यायिक कार्य से विरत रहने का पत्रक सौंपा।

 

प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि तहसील परिसर में खुलेआम भ्रष्टाचार हो रहा है और आम वादकारियों से पैसे लेकर फैसले प्रभावित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहाकि तहसील में प्राइवेट कर्मचारियों को रखकर वादकारियों से “बोली” लगाई जाती है और जो अधिक पैसे देता है, उसके पक्ष में निर्णय कर दिया जाता है।

 

अधिवक्ताओं का आरोप है कि न केवल फैसले प्रभावित किए जाते हैं, बल्कि जिन पक्षों से रिश्वत ली जाती है, उन्हें न्याय भी नहीं मिलता और पैसा भी वापस नहीं किया जाता। इसको लेकर अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश देखा गया। प्रदर्शन के बीच उस समय स्थिति और तनावपूर्ण हो गई जब अधिवक्ताओं ने न्यायालय में पहुंचकर एसडीएम से सीधे बातचीत की। अधिवक्ताओं ने बिना वकीलों की उपस्थिति के न्यायालय चलाए जाने पर कड़ा विरोध जताया और सुनवाई रोकने की मांग की। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।

 

एसडीएम ने अधिवक्ताओं को जवाब देते हुए कहा कि पुराने मामलों की सुनवाई की जा रही है और कार्य बाधित नहीं किया जा सकता। इस पर अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि बिना अधिवक्ता के किसी भी मामले की सुनवाई न्यायसंगत नहीं है। विवाद बढ़ने पर एसडीएम ने अधिवक्ताओं से कहा कि वे धरना-प्रदर्शन करें, लेकिन न्यायालय अपने कार्य करता रहेगा।

इसके बाद अधिवक्ताओं ने न्यायालय परिसर में ही नारेबाजी करते हुए न्यायिक कार्य का बहिष्कार कर दिया।

 

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पारस राम एडवोकेट, महासचिव सुमन्त कुशवाहा एडवोकेट, वरिष्ठ अधिवक्ता दयाशंकर सिंह, अशोक सिंह, प्रवीण राय और शशिभूषण राय सहित कई अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि तहसील के सभी कार्यालयों और न्यायालयों में भ्रष्टाचार व्याप्त है, जिससे न केवल तहसील की छवि खराब हो रही है बल्कि अधिवक्ताओं की प्रतिष्ठा भी प्रभावित हो रही है।

 

अधिवक्ताओं ने हाल ही में दिलदारनगर के नायब तहसीलदार पर लगे आरोपों का भी जिक्र किया, जिसमें दोनों पक्षों से रिश्वत लेकर एक पक्ष के खिलाफ फैसला देने का आरोप लगा था। उन्होंने कहाकि उस मामले में भी निष्पक्ष जांच के बजाय लीपापोती की जा रही है। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो वे अनिश्चितकालीन न्यायिक कार्य का बहिष्कार करते हुए धरना-प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।

 

वहीं, इस पूरे मामले पर उपजिलाधिकारी संजय यादव ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहाकि कोई भी कर्मचारी प्राइवेट नहीं है और सभी कर्मचारी नगरपालिका से संबद्ध हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अधिवक्ताओं की अनुपस्थिति में भी वादकारियों का पक्ष सुनते हुए लगभग 100 से 125 मामलों की सुनवाई की गई है।

 

घटना के बाद तहसील परिसर में अधिवताओं व अधिकारियों में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है और आगे की स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है। इस मौके पर शाहजहां खां, उमेश सिंह, शाहजहां खान, पूनम कुमार यादव, अब्दुल नसीम, संजीव सिंह, पारसनाथ सिंह, प्रमोद कुमार सिंह यादव, कौशल, राधाकृष्ण, मो. वारिस अली, जितेंद्र उपाध्याय सहित बार एशोसिएशन के सभी सदस्य शामिल रहे।

error: Content is protected !!
नमस्कार 🙏 हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे +91 9415000867 ,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें