बहादुरगंज गाज़ीपुर۔ मां चंडी धाम बहादुरगंज के परिसर में आयोजित श्री श्री महामृत्युंजय महादेव महायज्ञ में दूसरे दिन लोकप्रिय कथावाचक पंडित वीरेंद्र तिवारी जी द्वारा शिव–पार्वती विवाह का वर्णन अत्यंत भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह केवल एक पौराणिक घटना नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और प्रकृति के मिलन का प्रतीक है।
कार्यक्रम में पंडित तिवारी जी ने विस्तार से बताया कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उन्होंने वर्षों तक कठिन व्रत और साधना की, जिससे उनकी अटूट भक्ति का परिचय मिलता है। देवताओं ने भी इस विवाह के लिए प्रयास किए, क्योंकि शिव और शक्ति का मिलन सृष्टि के संतुलन के लिए आवश्यक था।
पंडित जी ने शिव बारात का रोचक वर्णन करते हुए कहा कि जब भगवान शिव बारात लेकर पहुंचे, तो उनका स्वरूप साधारण नहीं था। उनके साथ भूत-प्रेत, योगी और गण थे, जिसे देखकर माता पार्वती की माता चिंतित हो गईं। यह दृश्य भक्तों के लिए आश्चर्य और भक्ति का विषय बना।
इसके बाद भगवान शिव ने अपना दिव्य और सुंदर रूप प्रकट किया, जिससे सभी प्रसन्न हो गए और विधि-विधान के साथ विवाह संपन्न हुआ। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने इस कथा को बड़े ध्यान और श्रद्धा से सुना।
अंत में पंडित वीरेंद्र तिवारी जी ने कहा कि शिव–पार्वती विवाह हमें सच्चे प्रेम, धैर्य, तपस्या और समर्पण का संदेश देता है। यह कथा आज भी समाज को प्रेरणा देती है कि सच्ची निष्ठा और विश्वास से हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। इसके पूर्व दूसरे दिन आज पूजन अर्चन का कार्यक्रम राकेश तिवारी द्वारा सम्पन्न किया गया।
